जिले में नहीं हैं आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन
हापुड़। गर्मी बढ़ते ही जिले में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। सबसे अधिक मार अन्न दाताओं पर पड़ रही है। खेतों से ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन की चिंगारियों से आए दिन गेहूं की फसल स्वाहा हो रही है। इन घटनाओं पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग कर्मचारियों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
जनपद में फिलहाल दो स्थाई और एक अस्थाई फायर स्टेशन है। हापुड़ में मुख्यालय पर एक फायर स्टेशन है, जबकि गढ़ में सब स्टेशन है। पिलखुवा में एक अप्रैल से जुलाई तक सीजन ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा पिलखुवा में सब स्टेशन प्रस्तावित है। जिले में केवल पांच अग्निश्मन वाहन और एक बाइक ही मौजूद है। इन संसाधनों के बलबूते पूरे जनपद में आग लगने की घटनाओं पर काबू पाना काफी मुश्किल है। जिसके कारण लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में तीन बड़े वाटर टैंक (अग्निशमन वाहन) की आवश्यकता है।
पिछले वर्ष आगजनी की हुई थीं 290 घटनाएं --
पिछले एक साल का आंकड़ा देखा जाए तो विभिन्न स्थानों पर जिले में 290 आगजनी की घटनाएं हुई। जिने इन घटनाओं में लोगों का छह करोड़ 39 लाख 63 हजार रुपये का नुकसान हुआ था। रिकार्ड के अनुसार इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई थी और चार लोगों को फायरमैन द्वारा बचा लिया गया था।
जनपद में कर्मचारियों की स्थिति
पद स्वीकृत उपलब्ध रिक्त
सीएफओ 01 0 01
एफएसओ 02 01 01
एफएसओ द्वितीय 02 01 01
लीडिंग फायरमैन 08 14 0
फायरमैन 52 27 25
चालक 07 06 01
कोट-
एफएसओ जीत पाल सिंह का कहना है कि स्वीकृति के सापेक्ष कर्मचारियों की कमी और संसाधनों का अभाव जरूर है। इसके बावजूद घटनाओं को रोकने और त्वरित कदम उठाने के लिए पूरे प्रयास किए जाते हैं। सभी कर्मियों को 24 घंटे सतर्क रहने के लिए भी निर्देश दिए हुए हैं।