तबादला होने के बाद भी एसडीएम के कोर्ट में बैठने पर भड़के वकील
गढ़मुक्तेश्वर। तबादला होने के बाद भी बार के प्रस्ताव को नकार एसडीएम के कोर्ट में बैठने पर वकील भड़क गए, उन्होंने विरोध में नारेबाजी कर मुकदमों के निस्तारण पर कड़ी आपत्ति जताई। सीओ के समझाने पर गुस्सा शांत होने पर वकील वापस लौटे।
जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को किए गए फेरबदल के तहत एसडीएम ज्योति राय को गढ़ से हटाकर उनके स्थान पर राममूर्ति त्रिपाठी को तैनात किया गया है, जिसके चलते मुकदमों का निस्तारण रुकवाने को बार कार्यकारिणी ने दोपहर बाद कोई भी कामकाज न करने का प्रस्ताव पास कर उसे एसडीएम कोर्ट में भेज दिया, लेकिन बार के इस प्रस्ताव को नकारते हुए एसडीएम ज्योति राय कोर्ट में पहुंचकर मुकदमों की सुनवाई करने की तैयारी में जुट गईं। इसका पता लगते ही मुकदमों का निस्तारण होने की आशंका से वकीलों में रोष फैल गया, जो आनन- फानन में एसडीएम कोर्ट में पहुंचकर हंगामा और नारेबाजी करने लगे। बार अध्यक्ष अमरपाल चौधरी, सचिव राजेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष बलराज त्यागी, सत्यप्रकाश चौहान, सुहेल आलम, बबलू भाटी, कलीम खान, मिलिन, श्रीनिवास, दीपक, महताब चौधरी ने आरोप लगाया कि तबादला होने के बाद भी एसडीएम ज्योति राय कोर्ट में बैठकर कई मुकदमों का निस्तारण करना चाह रही हैं, जो सरासर गलत और वादकारियों समेत वकीलों के हित के पूरी तरह विपरीत है। मौके पर पूर्व अध्यक्ष सुबोध त्यागी, सुरेंद्र नागर, सतेंद्र चौधरी, सीएस यादव. नरेश गिल, ओमपाल मावी, हेमंत गौड़, राजन चौहान, नरेश कुमार, मुकेश चौहान, सुशील दहिया, रोहताश, मनोज गोयल, सुकेंद्र ठाकुर, रामरतन, केएल चौहान ने तबादला होने के बाद मुकदमों की सुनवाई करने को एसडीएम का तनाशाही वाला कदम बताकर विरोध में नारेबाजी की। इधर हंगामा होता देख एसडीएम ज्योति राय ने सूचना देकर पुलिस को बुला लिया। इसी दौरान सीओ अशोक शुक्ल भी वहां पहुंच गए, जिन्होंने समझाकर वकीलों को शांत कराया।
एसडीएम ज्योति राय का कहना है कि बार का नो वर्क प्रस्ताव आने से पहले ही वह कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई कर रही थीं, लेकिन बाद में सुनवाई को स्थगित करते हुए सभी फाइलों में तारीख लगा दी गई है।