किसानों की समस्या पर भड़के भाकियू कार्यकर्ता
- राहत नहीं मिलने पर अनिश्चितकालीन धरने का एलान, आश्वासन पर माने
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़।
गन्ना भुगतान न मिलने के विरोध में सोमवार को भाकियू कार्यकर्ता भड़क उठे। कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर अधिकारियों से वार्ता की, लेकिन वार्ता विफल हो गई। इसके विरोध में किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी। मौके पर पहुंचे एसडीएम के आश्वासन पर किसानों ने धरना स्थगित कर दिया।
सोमवार को भाकियू के मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा और महिला विंग की जिलाध्यक्ष बबली सिंह के नेतृत्व में दर्जनों पदाधिकारी जिला मुख्यालय पहुंचे। पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार के शासनादेशानुसार गन्ना किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान 15 दिन में हो जाना चाहिए। सिंभावली और ब्रजनाथपुर शुगर मिल पर तीन महीने का करीब 375 करोड़ रुपये का बकाया है। शासनादेशानुसार ब्याज सहित गन्ना भुगतान दिलाया जाए। किसानों को पर्याप्त पर्ची नहीं मिलने के कारण इस बार किसान गेहूं की बुवाई भी नहीं कर सके हैं। अधिकांश गांवों में गन्ना माफियाओं द्वारा फर्जी बांड चलवाकर फर्जी सट्टा दर्शाकर पर्चियां विक्रय की जा रही हैं। अवैध गन्ना खरीदकर सप्लाई किया जा रहा है। अधिकांश गांवों में आवारा बछड़े, बछिया एवं सांडों द्वारा किसानों की फसल नष्ट की जा रही है। किसान के अपने खेत से अपना भराव करने के लिए कोई सीमा अथवा कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए।
किसानों ने ऊर्जा निगम द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ाए गई बिजली दरों को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने तत्काल ओटीएस योजना लागू करने और यह योजना लागू होने तक किसी भी किसान का घरेलू अथवा नलकूप कनेक्शन विच्छेदन नहीं करने की मांग की।
इन मांगों को लेकर किसानों के धरने पर जिला गन्ना अधिकारी और तहसीलदार पहुंचे, लेकिन लंबी वार्ता का कोई निष्कर्ष नहीं निकलने पर किसान कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी। डीएम के निर्देश पर मौके पर पहुंचे एसडीएम हनुमान प्रसाद के आश्वासन पर धरना स्थगित हो गया। भाकियू के मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा ने बताया कि किसानों की समस्या जल्द हल करने का आश्वासन मिला है। इसलिए धरना स्थगित कर दिया गया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान बबलू चौधरी, शब्बू चौधरी, मोनू, दिनेश त्यागी, चमन सिंह, इफ्तेखार खां, अशोक यादव, शाकिर अली, कृपाराम, सुभाष चंद, श्याम सुंदर, अय्यूब अली आदि मौजूद रहे।