गढ़ में गंगा नदी उफान पर, हाई एलर्ट
पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश के चलते टिहरी डैम, बिजनौर और हरिद्वार बैराज से पानी छोड़े जाने से गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में गंगा नदी लगातार उफान पर है। शुक्रवार दोपहर ब्रजघाट पर गंगा खतरे के निशान से महज 15 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। जिला प्रशासन ने हाई एलर्ट जारी कर दिया है। सभी चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए गए हैं ।
गंगा का जल स्तर बढ़ने से गढ़ खादर क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के हजारों बीघा जंगल पानी से चौतरफा घिर गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी संत कुमार का कहना है कि ब्रजघाट गंगा का जलस्तर 198.33 मीटर वाले चेतावनी के निशान को पार कर शुक्रवार की शाम को 198.58 मीटर पर पहुंच चुका है जो खतरे के निशान 198.73 से महज 15 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
गंगा के उफान पर पहुंचने से गढ़ खादर क्षेत्र में गड़ावली, लठीरा, नयाबांस, आरकपुर, बख्तावरपुर, रामपुर न्यामतपुर, काकाठेर मंढैया, कुदैनी वाली मंढैया, रामसिंह मंढैया समेत 15 से गांवों के जंगल और उसमें खड़ी फसलें चौतरफा पानी से घिर गई हैं। वहीं जंगल से लेकर निचले रास्तों पर काफी मात्रा में पानी भरने से हजारों ग्रामीणों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
आज खतरे के निशान को पार कर सकती है गंगा
हरिद्वार, टिहरी और बिजनौर बैराज से शुक्रवार दोपहर एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके आने से शनिवार दोपहर तक गंगा खतरे के निशान को पार कर सकती है।
सिंचाई विभाग कंट्रोल रूम के सूत्रों का कहना है कि पहाड़ों पर बारिश होने से बांधों में पानी की मात्रा काफी बढ़ी है, जिसके मद्देनजर शुक्रवार की दोपहर को हरिद्वार से 66 हजार क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 24 हजार और टिहरी से 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो शनिवार दोपहर तक ब्रजघाट गंगा में पहुंच जाएगा।
तहसील प्रशासन सतर्क
तहसील प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बाढ़ राहत चौकियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया। एसडीएम मीनू राणा और तहसीलदार सुभाष सिंह ने बाढ़ संभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने लेखपालों समेत राजस्व टीम को बाढ़ संभावित गांवों की स्थिति पर बारीकी से नजर रखकर इसकी रिपोर्ट भेजने की हिदायत दी है। एसडीएम ने बाढ़ संभावित गांवों में रहने वालों को भी पूरी तरह चौकसी बरतकर सतर्क रहने का निर्देश दिया है। वहीं जरूरत पड़ने पर लोगों को आवागमन के लिए नाव मुहैया कराने का भरोसा भी दिया है।
किसानों को करोड़ों रुपये की क्षति
निचले जंगल में जलभराव होने से हजारों बीघा पालेज समेत हरी सब्जी की खेती चौपट हुई है। वहीं किसानों को हरे चारे का संकट रुला रहा है। जलभराव से करोड़ों रुपये की क्षति की आशंका है।
बाढ़ राहत चौकियां और शामिल गांव
1. आलमपुर-भगवंतपुर- एदलपुर, प्रसादीपुर, हकीमपुर गांवड़ी, कुतुबपुर, जमालपुर, खानपुर, माकनपुर, सैदपुर, मुकीमपुर, झड़ीना।
2. अब्दुल्लापुर- इनायतपुर, कोथला खादर, अब्दुल्लापुर।
3. नक्का कुआं गढ़- रामपुर, न्यामतपुर, मुहम्मदपुर, शाकरपुर।
4. मीरा रेती गढ़- लठीरा, गढ़ खादर, गड़ावली, नयाबांस, बख्तावरपुर।
5. ब्रजघाट- आलमगीरपुर, चित्तौड़ा मोहिउद्दीनपुर, मुहम्मदपुर खादर, सालाबाद, बागड़पुर, पलवाड़ा, आलमनगर खादर, नवादा खुर्द खादर।
गंगानगर चारों ओर से पानी से घिरा
गंगा नदी के रौद्र रूप ने पूरे खादर क्षेत्र में दहशत फैलाई हुई है, लेकिन सर्वाधिक खतरा गंगा के रेतीले टापू में बसे गांव गंगानगर पर मंडरा रहा है। भाकियू मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा और जिला कार्यकारिणी सदस्य शब्बू चौधरी ने बताया कि मोबाइल पर हुई वार्ता में ग्रामीणों ने बताया कि उनका गांव चौतरफा गंगा की उफनती जलधारा के बीच घिरा हुआ है। इससे गांव से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना भी संभव नहीं हो पा रहा है।
आवश्यकतानुसार मिलेगी हर संभव मदद
गढ़मुक्तेश्वर तहसील प्रशासन को एलर्ट कर दिया गया है। सभी बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यकतानुसार हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी। लगातार जानकारी ली जा रही है।
- रजनीश राय, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व