ब्रजघाट। देहरादून में बादल फटने के कारण जलस्तर में तेजी के साथ बढ़ोतरी होने से गंगा नदी में एक बार फिर उफना गई है। इससे खादर क्षेत्र के हजारों परिवार बैचेन हो गए हैं। बुधवार को तहसील प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों को अधिक गहराई वाले पानी में न जाने की हिदायत दी है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से गड़ावली, नयाबांस, चक लठीरा, आरकपुर, बख्तावरपुर, शाकरपुर, इनायतपुर, न्यामतपुर समेत खादर क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण परेशान हैं। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह सोलंकी का कहना है कि उत्तराखंड में बादल फटने के कारण बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने पर जलस्तर बढ़ गया है। इससे हजारों बीघा निचले जंगल में पानी भरने से फसलों को नुकसान होने के साथ ही पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों को करीब 20 मील लंबा सफर तय करते हुए बांगर क्षेत्र के जंगल से घास और चारा लाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
20 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर
24 घंटों के भीतर गढ़ ब्रजघाट का जलस्तर 20 सेंटीमीटर बढ़ गया है। केंद्रीय जल आयोग के गेज अधिकारी आबाद आलम ने बताया कि बादल फटने के साथ ही बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण ब्रजघाट गंगा का जलस्तर 198.33 मीटर से बढ़कर 198.53 मीटर के निशान पर पहुंच चुका है।
ग्रामीणों को मदद का दिया भरोसा
एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया कि गंगा के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी को देखते हुए उन्होंने बाढ़ प्रभावित कई गांवों का का निरीक्षण किया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को अधिक गहराई वाले स्थानों पर न आने जाने की सलाह देने के साथ ही पशुओं के लिए चारा आदि मुहैया कराने का भरोसा दिया गया है।