सेबी से अलग होगा हापुड़ कमोडिटी एक्सचेंज
-सेबी की शर्तों को पूरा न करने पर सामान्य बैठक में लिया गया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। हापुड़ कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड के सदस्यों व शेयर होल्डर्स की सामान्य बैठक में सर्वसम्मति से सेबी से अलग होने का निर्णय लिया गया। सेबी शेयर बाजार और वायदा बाजार को नियंत्रित करता है। हालांकि बैठक हंगामेदार रही जिसमें एक दूसरे पर खूब आरोप प्रत्यारोप लगे।
अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंहल ने बताया कि सेबी ने एक्सचेंज से तीन वर्ष के अंदर सौ करोड़ का कुल मूल्य पूर्ण किए जाने का निर्देश दिया था। इसे किसी भी स्थिति में पूर्ण किया जाना संभव नहीं था। क्योंकि वर्ष 1923 से लेकर आज तक यह कंपनी एक्ट की धारा आठ के अंदर रजिस्टर्ड थी। इसकी 85 प्रतिशत आय को उसी वर्ष में खर्च कराना आवश्यक था। जबकि वर्तमान में एक्सचेंज का नेटवर्थ (कुल मूल्य) चार करोड़ के आसपास है। सेबी ने बार-बार निर्देश दिया कि सौदे की कच्ची पर्ची को भरने में हो रही कमी को सुधारा जाए। यहां तक कि अॅानलाइन करने की बात कही गई, लेकिन कारोबारी इसके लिए तैयार ही नहीं हुए।
सितंबर 2015 में तीन रीजनल एक्सचेंज सेबी के नियंत्रण में आए थे, लेकिन सेबी की जटिल शर्तों को पूरा न करने के कारण तीनों ही बंद हो गए। इसमें दो एक्सचेंज पहले ही बंद हो चुके हैं और हापुड़ एक्सचेंज को अब वायदा व्यापार बंद करने की नीति को मजबूरन स्वीकार करना पड़ा है। वहीं, चार्टर्ड एकाउंटेंट ने बैठक में बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में सेबी की शर्तों पर वायदा कारोबार चलाना पूर्णतया असंभव है। उसके बाद सभी ने सेबी से अलग होने का निर्णय लिया। हालांकि बैठक के दौरान हंगामा भी हुआ। सदस्यों ने इस मामले को लेकर एक दूसरे पर खूब आरोप प्रत्यारोप लगाए।
इस दौरान पूर्व चेयरमैन ललित कुमार छावनी वाले, कपिल एसएम, दिनेश कुमार मित्तल, राकेश अग्रवाल, पुनीत गोयल, विनीत दीवान, रोहित गर्ग, राजेश अग्रवाल, राजेंद्र बाबा, सुधीर अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, उत्तम चंद गोयल आदि उपस्थित थे।