बारिश ने राहत दी, ओलावृष्टि ने रुलाया
गढ़मुक्तेश्वर। क्षेत्र में बृहस्पतिवार को झमाझम बारिश के साथ ओलावृष्टि भी खूब हुई। हालांकि बारिश कुछ फसलों के लिए लाभदायक है, लेकिन सरसों समेत हरी सब्जी की खेती के साथ खेतों में पानी भरने से गेहूं की पछेती फसल को काफी नुकसान हो सकता है। यही नहीं ओलावृष्टि से भी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
ओलावृष्टि होने से किसानों को खूब चपत लगी है। बृहस्पतिवार तड़के 6 से आठ बजे तक रुक रुककर बारिश हुई, जिसे देख किसानों के चेहरे खिल गए। बारिश का सिलसिला धीमा पड़ने पर कुछ देर तक तक ओलावृष्टि होने से किसानों के होश उड़ गए। बारिश के दौरान तेज हवा चलने से अगेती गेहूं समेत सरसों की फसल खेतों में बिछ गई, जबकि गंगा खादर क्षेत्र के खेतों में पानी भरने से सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल को भी नुकसान हुआ है। बारिश होने से गन्ने की कटाई भी नहीं हो पाई।
खेतों में लहलहा रही सरसों समेत फूल गोभी, आलू, टमाटर, मटर, पालक, शलजम, मूली, प्याज, गाजर समेत हरी सब्जी की खेती को काफी नुकसान हुआ है। इससे किसान काफी परेशान हैं। बारिश के साथ तेज हवा और ओलावृष्टि होने से गढ़, बहादुरगढ़, झड़ीना, नानपुर, सिंभावली, बक्सर क्षेत्र में सरसों और अगेती गेहूं समेत गन्ने की हजारों बीघा फसल औंधे मुंह जमीन पर गिर पड़ी है।
मुरादनगर कृषि अनुसंधान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ.अरविंद यादव और कृषि प्राविधिक सहायक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि बारिश से गेहूं की उस फसल को फायदा होगा, जो पांच से 6 सप्ताह पहले बोई गई थी। गेहूं की पछेती फसल में पानी होने से काफी नुकसान हुुआ है। वहीं ओलावृष्टि और तेज हवा चलने से सरसों समेत हरी सब्जी और गन्ने की फसल गिरने से उसमें और भी ज्यादा नुकसान हुआ है।
--क्या कहते हैं तहसीलदार।
तहसीलदार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि बारिश के साथ काफी हल्की ओलावृष्टि हुई है, जिससे फसलों में कोई खास नुकसान नहीं पहुंच पाया है।