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जल निगम की रिपोर्ट में जसरूपनगर का पानी ओके !

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रिपोर्ट में पानी पीने योग्य, फिर भी बीमार पड़ रहे लोग
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- जल निगम की रिपोर्ट में जसरूपनगर का पानी ओके!
- पीड़ित ग्रामीणों ने सरकार की रिपोर्ट पर उठाया सवाल
- अफसरों ने लिए सिर्फ सरकारी हैंडपंपों से पानी के सैंपल
- 95 फीसदी लोग अपने घरों में लगे हैंडपंपों का पीते हैं पानी
- ग्रामीण बोले: आधे घंटे में पीला पड़ जाता हैं घरों में लगे हैंडपंपों का पानी
- जल निगम पर लगाया लापरवाही का आरोप, दोबारा सैंपलिंग कराने की मांग की
हापुड़। जल निगम की रिपोर्ट में जसरूपनगर गांव का पानी ओके बताया गया है। जबकि ग्रामीण इस रिपोर्ट को खारिज कर रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि टीम ने सिर्फ सरकारी हैंडपंपों से पानी के सैंपल भर लिए। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि 10 हजार की आबादी वाले इस गांव के 95 फीसदी लोग अपने घरों में लगे नलों के पानी का सेवन करते हैं। उधर, ग्राम प्रधान का आरोप है कि जल निगम के नलों का पानी भी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में निगम की रिपोर्ट संशय पैदा कर रही है। ग्रामीणों ने निष्पक्षता से पानी की जांच कराने की मांग की है।
दरअसल, जसरूपनगर में धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र का केमिकल युक्त पानी भरने से गांव का भूगर्भ जल दूषित हो चुका है। बीते दो दिनों में तीन लोगों की मौत पेट में संक्रमण के कारण हो चुकी है। इसके बाद डीएम के आदेश पर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाया था। इस दौरान बड़ी संख्या में पेट के मरीज पहुंचे थे। टीम के चिकित्सक डा.जुल्फीकार गुफरान ने भी दूषित पानी के कारण ही ग्रामीणों में यह समस्या होने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद जल निगम की टीम ने गांव से पानी के सैंपल लिए थे। लेकिन इसकी सूचना न तो ग्राम प्रधान को दी गई और न ही किसी ग्रामीण को इसकी भनक लगी।
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बुधवार को जांच रिपोर्ट आने पर जल निगम के अधिशासी अभियंता वीके जैन से बात करने पर उन्होंने बताया कि जसरूपनगर से जो पानी का सैंपल भरा गया था, वह ओके है। पानी में कोई खराबी नहीं है। शुक्रवार को 10 अन्य सरकारी हैंडपंपों से सैंपल भरे जाएंगे। उन्होंने लोगों के घरों में लगे हैंडपंपों से पानी के सैंपल भरने से साफ इंकार कर दिया।

-10 हजार की आबादी सरकारी नल सिर्फ 60
ग्राम प्रधान पति वीरेंद्र कुमार ने बताया कि जसरूपनगर की आबादी करीब 10 हजार है। लेकिन गांव में महज 60 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। जबकि 95 फीसदी ग्रामीण अपने घरों में लगे हैंडपंपों के पानी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी महकमा लोगों की सेहत को लेकर कितना फिक्रमंद है।
- ग्रामीणों ने घरों में लगे हैंडपंपों के
पानी की जांच कराने की उठाई मांग-
जल निगम की रिपोर्ट से असंतुष्ट ग्रामीणों ने घरों में लगे हैंडपंपों के पानी की जांच कराने की मांग उठाई है। ऐसा नहीं होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

- पूर्व में जल निगम की टीम सरकारी
हैंडपंपों का पानी बता चुकी है खराब-
ग्राम प्रधान पति विरेंद्र कुमार का दावा है कि पहले जल निगम की टीम ही पानी की जांच की थी। गांव में लगे सरकारी हैंडपंपों का पानी टीम खराब बता चुकी है। नल के नीचे जमे पीले पदार्थ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी नालों का पानी भी किस हद तक पीने योग्य है।

-जल निगम की रिपोर्ट से खटाई
में ओवर हैड टैंक का प्रस्ताव-
ग्रामीण डीएम से गांव में शुद्ध पेयजल के लिए पानी की टंकी की मांग उठा चुके हैं। डीएम कृष्णा करुनेश ने भी बीते दिनों जांच में पानी अशुद्ध मिलने पर ग्रामीणों को ओवर हैड टैंक की सौगात दिलाने की बात कही थी। लेकिन जल निगम की रिपोर्ट में पानी ओके मिला है, ऐसे में पानी की टंकी का प्रस्ताव खटाई में ापड़ता दिख रहा है।

-डीएम का कथन-
जिलाधिकारी कृष्णा करुनेश का कहना है कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों की मांग पर घरों में लगे हैंडपंपों के पानी की भी जांच कराई जाएगी।


फोटो फाइल संख्या 11एचपीआर पीएच-08

एसडीएम ने जाना जसरूपनगर के लोगों का हाल

- दूषित पानी से फैल रही समस्याओं से जल्द राहत का दिलाने का दिया आश्वासन
- ग्रामीणों ने गांव के वाह्य छोर पर रास्ता बनवाने की उठाई मांग
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। जसरूपनगर में दूषित पानी के कारण फैले संक्रमण से तीन लोगों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासनिक अधिकारी सजग हो गए हैं। बुधवार को एसडीएम ने गांव का निरीक्षण कर लोगों की समस्या को सुना और वहां व्याप्त अव्यवस्थाओं का संज्ञान लिया। ग्रामीणों को जल्द दूषित पानी से राहत का आश्वासन दिया है।
उल्लेखनीय है कि दूषित जलभराव के कारण जसरूपनगर में दो दिन के अंदर तीन लोगों की मौत पेट में संक्रमण के कारण हो गई थी। ग्रामीणों ने दूषित पानी को मौत का कारण बता काफी हंगामा भी किया था।
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बुधवार को एसडीएम अजय श्राीवास्तव ने गांव का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने एसडीएम को दूषित पानी से फैल रही बीमारी और धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के केमिकल युक्त पानी से राहत दिलाने की मांग उठाई। इस दौरान ग्रामीणों ने वाह्य छोर पर रास्ता के पुन: निर्माण की भी गुहार लगाई। ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम ने गंभीरता दिखाते हुए जल्द राहत का आश्वासन दिया है।
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