ब्रजघाट में पुराना पुल चालू होने से सफर होगा आसान
गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट के पुराना पुल की मरम्मत होने से हाइवे का सफर अब आसान होगा। गंगा भक्तों से लेकर दिल्ली लखनऊ हाइवे पर सफर करने वाले लोगों को जाम से राहत मिलेगी
ब्रजघाट गंगा के पुराने सड़क पुल का निर्माण अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिलने के बाद हुआ था, जिसका उद्घाटन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने सन 1962 में किया था। पुल के जर्जर होने पर एनएचएआई ने सन 2012 में इसे आवागमन के लिए पूरी तरह बंद कर दोनों साइड में दीवार का निर्माण कराते हुए सभी वाहनों का आवागमन नए पुल पर डायवर्ट कर दिया था। दिल्ली लखनऊ हाइवे पर प्रतिदिन हजारों वाहन ब्रजघाट गंगा के नए पुल से होकर निकलते आ रहे थे, जिस वजह से पुल में अक्सर जाम लगने के साथ ही दुर्घटनाएं भी बढ़ गई थीं। जिसके चलते एनएचएआई ने साढ़े सात सौ मीटर लंबे पुराने पुल की मरम्मत कराने का बीड़ा उठाया था। एक अप्रैल 2017 को प्रारंभ हुआ मरम्मत का काम पूरा होने पर पीडी वीके बंसल ने 11 मार्च को पुराना पुल वाहनों के आवागमन के लिए खुलवा दिया था। लेकिन उद्घाटन के दो दिन बाद ही मरम्मत पर बीस करोड़ की रकम खर्च होने वाले पुराने गंगा पुल की सड़क का कई मीटर हिस्सा बुरी तरह टूट गया था, जिससे वाहन चालकों को दिक्कत होने के साथ ही हादसे होने का अंदेशा बढ़ने पर एनएचएआई ने आनन फानन में टूटी सड़क की मरम्मत करा दी थी। मगर दो दिन बाद ही सड़क फिर से टूट गई थी, जिस पर एनएचएआई ने टिन शेड और बल्लियों की बैरिकेडिंग कराते हुए पुराने गंगा पुल को पूरी तरह बंद करा दिया था। जिससे नए पुल पर वाहनों का लोड बढ़ने से आवागमन प्रभावित होने पर सफर करने वालों को दिक्कत सहनी पड़ रही थीं। इसके अलावा 20 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर लाखों गंगा भक्तों समेत लाखों मुसाफिरों को भी आवागमन में दिक्कत के साथ ही जाम की समस्या से भी दोचार होना पड़ा था।
एनएचएआई के डीजीएम मोहम्मद खालिद का कहना है कि मार्च के दौरान मौसम में ठंडक होने की वजह से पुराने पुल की सड़क पर बिछाई गई तारकोल की परत टूटने गई थी। जिसके कारण पुराने पुल को 15 मार्च में आवागमन को फिर से बंद करा दिया गया था। अब मरम्मत कराकर पुल को फिर से चालू करा दिया गया है।