गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर 506 करोड़ बकाया
हापुड़। आलू पर एक बार फिर मंदे की मार पड़ने तथा गन्ने का भुगतान नहीं होने से किसानों पर मानों आफत आ पड़ी है। जिला प्रशासन के अधिकारी चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं कर रहे बल्कि उनके साथ नरम रुख अपनाकर अपनी औपचारिकता मात्र निभाते हैं। जबकि जिले भर के किसानों का चार चीनी मिलों पर 506 करोड़ रुपये बकाया है।
हापुड़ जिले में किसान आलू, गन्ना गेहूं और धान के साथ हरि सब्जियों की खेती करते हैं। पिछले कई सालों से आलू की खेती करने वाले किसानों पर मंदी की मार पड़ती रही है। इस बार आलू की पैदावार कम होने के कारण माना जा रहा था कि अच्छा भाव मिलेगा। लेकिन अब तक भाव में कोई खास सुधार नहीं हो सका।
आलू के प्रमुख किसान और कारोबारी अनिल गुप्ता का कहना है कि इस बार हापुड़ जिले के शीतगृहों में करीब 16 लाख कट्टा आलू ही रखा गया है। आलू भंडारण के तीन महीने बीत जाने के बाद भी आलू के कट्टे पर सिर्फ 100 रुपये बढ़े हैं तथा निकासी भी कम है। जबति 130 रुपये प्रति कट्टा (50 किलो) आलू के भंडारण का किराया है। इससे साफ है कि आलू पर अभी तक मंदे की मार जारी है।
आलू से भी ज्यादा आफत गन्ना उत्पादक किसानों की है। जबकि आलू की खेती आर्थिक रूप से सबसे पक्की मानी जाती है। लेकिन गन्ने का भुगतान नहीं होने के कारण जिलेभर के गन्ना किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। हालात यह हैं कि किसानों को अपनी बेटियों के हाथ पीले करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में भी मंदे की असर साफ दिखलाई पड़ता है।
असौड़ा गांव में एक बैंक्वट हाल के स्वामी दुष्यंत त्यागी का कहना है कि इस आर्थिक संकट का असर शादियों के घटते बजट के रूप में देखने को मिल रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि उनकी लगभग रोज बड़ी संख्या में गन्ना किसानों से बातचीत होती है। उनके मन की बात सुनकर पता चलता है कि पता नहीं कितने किसान ऐसे हैं जिनको गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण अपनी बेटियों के हाथ पीला करना भयंकर संकट के समान है। लेकिन जिले के आला अफसरों की इसकी कोई परवाह नहीं है। बल्कि असलियत यह है कि मिल मालिकों के खिलाफ सिर्फ औपचारिक कार्यवाई की जाती है।
यह बात अलग है कि जिलाधिकारी अदिति सिंह लगातार इस मामले में सख्त हैं तथा आए दिन लापरवाह अफसरों पर फटकार भी पड़ती है। वह साफ कह चुकी हैं कि अगर मिल मालिक जानबूझ कर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं करते हैं, तो उनके सख्त एक्शन होगा।
कोट--
जिले के गन्ना किसानें का गन्ना खरीदने वाली सिंभावली चीनी मिल पर 378 करोड़, ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर 107 करोड़, मोदी मिल पर 14.8 करोड़ और नगला मल चीनी मिल पर 6.32 करोड़ रुपये बकाया है। कुल मिलाकर करीब 506 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। प्रदेश और जिला प्रशासन के अधिकारी किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का तेजी से भुगतान कराने के लिए प्रयासरत हैं।
- ओम प्रकाश सिंह-जिला गन्ना अधिकारी हापुड़