बीस करोड़ खर्च होने के बाद भी बंद है पुराना गंगा पुल
गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट गंगा के पुराना पुल बंद होने से जाम की समस्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। पुल की मरम्मत कार्य में लगभग 20 करोड़ खर्च हुए लेकिन इसमें बरती गई अनियमितता के चलते दो दिन बाद ही सड़केें टूटने लगीं। जिसके चलते पुल को फि र से बंद करा दिया गया। जिसके चलते सोमती अमावस्या व ज्येष्ठ दशहरे पर लगने वाले भारी जाम से लोगों को जूझना पड़ा।
देश की आजादी के बाद ब्रजघाट गंगा पर सड़क पुल का निर्माण कराया गया था, जिसका शुभारंभ 1962 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था। पुल के जर्जर होने पर एनएचएआई द्वारा जून 2012 में इसे बंद करा दिया गया। वाहनों का आवागमन रोकने को दोनों साइडों में दीवार का निर्माण भी करा दिया गया था। जिसके बाद से दिल्ली लखनऊ हाईवे पर सफर करने वाले लाखों वाहन ब्रजघाट गंगा के नए पुल से होकर निकलते आ रहे थे, जिसके चलते नए पुल पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम लगने लगा। जिसे देखते हुए एनएचएआई ने साढ़े सात सौ मीटर लंबे पुराने पुल की मरम्मत कराकर उस पर आवागमन चालू कराने की योजना बनाई। एक अप्रैल 2017 को करीब बीस करोड़ की लागत से मरम्मत का कार्य कराया गया। 11 मार्च को पुराना पुल फिर से खोल दिया गया था। लेकिन मरम्मत कार्य में बरती गई अनियमितता के चलते पुल खुलने के दो दिन बाद ही सड़कें टूटने लगी। छह दिन बाद ही इस पुल को फिर से बंद करा दिया गया। वर्तमान में पुल की मरम्मत का कार्य फिर से कराया जा रहा है।
मरम्मत कार्य में हुई अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच की मांग
गंगा विचार मंच के वेस्टर्न यूपी सह संयोजक अशोक शर्मा का कहना है कि मरम्मत कार्य में बीस करोड़ की रकम खर्च होने के बाद भी सड़क टूटने से पुराना पुल महज 6 दिन में बंद होना बेहद गंभीर मामला है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर सच्चाई सामने लाया जाना बेहद जरूरी है। तीर्थ पुरोहित देवेंद्र राय गौतम का कहना है कि पुराना पुल बंद होने से नए पुल पर वाहनों का दबाव बढने से आए दिन जाम लग जाता है, जिससे गंगा भक्तों समेत हाईवे पर सफर करने वाले परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
20 जून को पुल चालू करने का दावा
एनएचएआई पीडी विनय बंसल ने बताया कि मरम्मत का काम आखिरी दौर में आ चुका है, जिससे ब्रजघाट गंगा का पुराना पुल 20 जून को आवागमन के लिए खोला जाना है। मरम्मत के तीसरे ही दिन पुल की सड़क टूटने के संबंध में उन्होंने बताया कि मार्च में तापमान अपेक्षा के मुकाबले कम था, जिससे सही ढंग में तारकोल न जमने पर सड़क में टूटफूट हुई थी।