किसानों की दशा सुधारेगी मशरूम की खेती
गढ़मुक्तेश्वर। आर्थिक तंगी में घिरे किसानों की दयनीय हालत मशरूम की खेती सुधारेगी, महज 40 दिन में तैयार होने वाली मशरूम की बिक्री औसतन 120 रुपये किलो के रेट में होती है। साथ ही मशरूम में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के चलते इससे रोगियों को भी लाभ मिलता है।
आबादी में बढ़ोतरी होने पर बंटवारे होने से कृषि जोत तेजी के साथ सिमटती जा रही है, जिससे हाड़ तोड़ मेहनत मशक्कत करने के बाद भी किसानों की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है। क्योंकि मौसम की मार, अघोषित सूखा, बिजली किल्लत तो फसलों का वाजिब दाम भी नहीं मिल पाता है। ऐसी परिस्थिति में किसानों को अपनी आर्थिक हालत सुधारने को परंपरागत खेती की बजाए वैज्ञानिक तरीके और व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देना जरूरी होता जा रहा है। जिसके तहत पहाड़ों पर बोई जाने वाली मशरूम की खेती को मैदानी इलाकों में उगाकर किसान कहीं अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं।
किस मौसम में करें फसल की बुआई
कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि मशरूम को कुकुरमुत्ता, छरक, खुंब और खुंबी जैसे नामों से भी जाना जाता है, जिसके बीज का अंकुरण 22 से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस और फलन 14 से लेकर 16 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होता है। मैदानी इलाके में खेती के लिए नवंबर से लेकर फरवरी का समय सबसे उपयुक्त है, हालांकि अब एयर कंडीशन में तापमान संतुलित कर पूरे साल उत्पादन लिया जाना मुमकिन है।
- कंपोस्ट खाद में तैयार होता है बीज
कृषि प्राविधिक सहायक ने बताया कि भूसा, यूरिया, चोकर, जिप्सम, शीरे से कंपोस्ट तैयार कर उसे पॉलीथिन बैगों में भरकर उसमें बीज तैयार किया जाता है।
40 दिन में तैयार हो जाती है फसल
मशरूम की फसल करीब 40 दिनों में तैयार हो जाती है, जिसकी बिक्री औसतन 120 रुपये प्रतिकिलो के रेट में होती है।
मशरूम का सेवन कई बीमारियों से बचाता है।
कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि मशरूम में पोटेशियम, फॉस्फोरस, सल्फर, कैल्शियम, लोहा, तांबा, आयोडिन, जिंक की उपयुक्त मात्रा होने से यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। जिससे मोटापा कम होने के साथ ही हृदय रोगियों को लाभ मिलता है और इंसुलिन की मात्रा बढ़ने से मधुमेह रोगियों को फायदा होता है।
गढ़ के सेंटर से एनसीआर क्षेत्र में हो रही सप्लाई
गढ़ में पिछले दिनों एग्रो मशरूम फार्म खुला था, जो एनसीआर क्षेत्र के अभी तक इकलौता फार्म है। जिसमें प्रतिदिन ढाई सौ किलो मशरूम का उत्पादन कर उसे दिल्ली समेत विभिन्न शहरों में सप्लाई किया जाता है।