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तीन सप्ताह पहले सील हुए दूध प्लांट का संचालन फिर शुरू हुआ

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तीन सप्ताह पहले सील दूध प्लांट का संचालन फिर शुरू
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा को प्रदूषित करने के आरोप में तीन सप्ताह पहले सील दूध प्लांट का संचालन मानक पूरे किए जाने पर फिर से शुरू हो गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हिदायत पर तीन सदस्यीय टीम ने सील खोली।
आबादी समेत कई फैक्ट्रियों का दूषित पानी गंगा में गिर रहा है। इसे लेकर हुईं शिकायतों के आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हिदायत पर एक जून को विभागीय टीम समेत तहसील प्रशासन ने गांव बहादुरगढ़ के जंगल में चल रहे दूध प्लांट डेयरी क्राफ्ट इंडिया को सील कर दिया था। यह प्लांट पिज्जा पर लगने वाली चीज तैयार कर उसे शहरों को सप्लाई करता है। डेयरी क्राफ्ट इंडिया की वाइस प्रेसीडेंट ईशा जुनेजा ने अपने प्लांट से जुड़े अपशिष्ट का निपटारा करने के लिए ईटीपी और टर्शरी फिल्टर समेत सभी अत्याधुनिक मशीन मौजूद होने का उल्लेख कर हाल ही में प्लांट पर लगी सील खुलवाने की गुहार लगाई थी। इस आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेट्री ए. सुधाकर ने प्लांट पर लगी सील खोलने का आदेश दिया था। उसके बाद यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाजियाबाद के एक्सईएन बीके सिंह, नायब तहसील संजय सिंह समेत तीन सदस्य टीम शनिवार को बहादुरगढ़ पहुंची, जिसने दूध प्लांट की सील को खोल दिया।
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अपशिष्ट की ऑन लाइन निगरानी
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाजियाबाद के एक्सईएन बीके सिंह ने बताया कि किसी भी औद्योगिक इकाई का दूषित पानी गंगा में नहीं गिरने दिया जाएगा। जिस डेयरी क्राफ्ट इंडिया पर लगी सील खोली गई है उसके साथ ही दूसरी फैक्ट्रियों से जुड़े अपशिष्ट की भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिल्ली कार्यालय से 24 घंटा ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।
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पशुपालकों और मजदूरों के चेहरे खिले
डेयरी क्राफ्ट इंडिया में सौ से भी अधिक मजदूर काम करते हैं, जो प्लांट पर सील लगने के बाद से परिवार की गुजर बसर के लिए इधर-उधर धक्के खा रहे थे। वहीं प्लांट में प्रतिदिन करीब 15 हजार लीटर दूध की खपत होती है। इसे हापुड़, बुलंदशहर, संभल, अमरोहा समेत आसपास के कई जनपदों के हजारों किसान मुहैया कराते हैं। प्लांट पर लगी सील खुलने से जहां मजदूरों समेत उनके परिजनों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं दूध की सप्लाई को लेकर दिक्कत झेल रहे किसान भी अब खुश हैं।
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