योगी सरकार के मंगलवार को 100 दिन पूरे होने हो गए। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से किए गए कई वादे अब भी आधे अधूरे पड़े हैं। बिजली व्यवस्था पर सरकार का सबसे ज्यादा फोकस था। लेकिन उमस भरी गर्मी ने इस व्यवस्था को भी बेपटरी कर दिया है। किसानों को घोषणाओं के अनुसार लाभ नहीं मिल पाया है।
घोषणा के अनुसार नहीं मिल रही बिजली आपूर्ति- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही शहर को 24 और देहात अंचल को 20 घंटे बिजली आपूर्ति देने की घोषणा की थी। लेकिन यह दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। लोग गर्मी से त्रस्त हैं। देहात में तो हालात और भी बदतर हैं।
जली फसल का नहीं मिल रहा मुआवजा- सीएम ने विद्युत तारों से निकली चिंगारी से जली फसल का मुआवजा किसानों को दिलाने की घोषणा की थी। लेकिन जिले के अधिकांश किसान अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं।
जिले में दो बड़े बिजलीघर हुए चालू- बेहतर बिजली आपूर्ति देने के लिए बदनौली में 765, आनंद विहार में 220केवीए क्षमता के बिजलीघर चालू हो चुके हैं, इनसे करीब पांच जिलों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिलने का दावा किया जा रहा है।
24 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलवाने की सुविधा- मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 24 घंटे में ट्रांसफार्मर की बदली का दावा स्थानीय निगम अफसरों ने भी किया है, इसके लिए टॉल फ्री नंबर भी जारी किया गया है। लेकिन सुविधाओं पर अव्यवस्थाएं हावी हैं।
कानून व्यवस्था- कानून व्यवस्था को चाक चौबंध करने और महिला अपराध को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने ने एंटी रोमियो का गठन किया था। शुरुआत में तो एंटी रोमियों काफी सक्रिय रहा, लेकिन अब यह अभियान भी दम तोड़ रहा है।
किसानों के आलू खरीद की योजना पस्त- आलू किसानों को राहत दिलाने के उद्देश्य से सीएम ने आलू खरीद की योजना शुरू की थी। लेकिन जिले में बने दो केंद्रों पर किसानों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सका। मजबूरी में कई किसानों ने अपना आलू खेत में ही छोड़ दिया।
ऋण माफी और गन्ना भुगतान का दावा भी नहीं उतरा खरा- सीएम ने किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ करने की घोषणा की थी। बैंकों से किसानों को ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। गन्ना किसानों को आदेशानुसार भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान रहा फ्लॉप- सीएम ने 15 जून तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की घोषणा की थी। लेकिन जिले में 70 फीसदी सड़कें ही दुरस्त की जा सकी हैं, 30 फसदी सड़कें अभी भी खस्ताहाल हैं।
सरकारी भर्तियों पर रोक से बढ़ रही बेरोजगारी-रोजगार देने के बजाय सरकार ने अधिकांश सरकारी भर्तियों पर रोक लगा दी है, इससे युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
क्राइम नियंत्रण में विफल हो रही सरकार- सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ने अपराधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए अपराध छोड़ने की नसीहत दी थी। साथ ही सूबे में कानून व्यवस्था कायम करने का भी दावा किया था। लेकिन जिले में तेजी से क्राइम का ग्राफ बढ़ा है, लूट, मर्डर जैसी घटनाओं में तेजी आ गई है।
एंटी भू-माफिया का गठन- योगी की प्राथमिक योजनाओं में सरकारी भूमि, तालाबों को कब्जा मुक्त कराना था। इसके लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था। लेकिन यह टास्क फोर्स सिर्फ खानापूर्ति में ही निपटता नजर आ रहा है।