जल जनित बीमारियों का दंश झेल रहे सिंभावली क्षेत्र के फिलहाल 10 गांवों में जिला पंचायत लाखों रुपये से पानी की पाइप लाइन बिछाएगा। प्रथम चरण में इन गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां जिला पंचायत पानी की टंकियां बनाने का प्रस्ताव भेजा है।
सिंभावली और बक्सर समेत डिस्टलरी से जुड़े गंदे नाले के आसपास बसे गांवों का भूजल बुरी तरह दूषित हो चुका है। इसके चलते इलाके में गंभीर बीमारियां पांव पसार चुकी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने भी इन गांवों के पानी के नमूने को दूषित करार दिया है।
इसलिए मतनौरा, छतनौरा, हिम्मतपुर, महमूदपुर, बंगोली, खुड़लिया, सैना, मुरादपुर, टोडरपुर, बंगोली, नवादा और सिंभावली के नई आबादी वाले क्षेत्र को चिन्हित कर जल निगम को प्रस्ताव भेजा गया है।
जल निगम ने इन गांवों के पानी के नमूने जांच के लिए भेजा है। जिला पंचायत जल समिति अध्यक्ष और पूर्व चेयरमैन सुनीता यादव का कहना है कि विभागीय स्तर से दूषित भूजल वाले गांवों में टंकी बनवाने का प्रस्ताव जल निगम को भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि दस गांवों में टंकी निर्माण पर 15 करोड़ से अधिक की लागत आने का अंदाजा है। जबकि पाइप लाइन बिछाने पर भी करोड़ों की लागत आएगी। जल निगम एक्सईएन एसके जैन का कहना है कि जिले में 59 गांवों का चयन किया गया है, जहां भूजल दूषित हो चुका है।
56 गांवों में टंकी निर्माण कराया जा चुका है अथवा चल रहा है या प्रस्तावित है। जबकि हापुड़ के तीन गांवों में टंकी निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। काली नदी के पास वाले 20 गांवों का भूजल दूषित होने की पुष्टि हो चुकी है, जहां टंकी निर्माण कराया जाना है।
दूषित पानी के सेवन से हेपेटाइसि ए समेत टायफाइड, पैरा टायफाइड, डायरिया, आंतों में इंफेक्शन जैसे कई गंभीर बीमारियां होती है।