हमीरपुर। लखपति दीदी योजना के तहत जिले की आठ हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लखपति दीदी बनी हैं, जो विभिन्न प्रकार के उत्पादनों के माध्यम से अच्छी कमाई कर रही हैं। अब सरकार बजट में नई दिशा और बड़ा बाजार शुरू कराने की पहल की है। इससे उनकी आय और बढ़ेगी। लखपति दीदियों के लिए जनपद में अब करोड़पति दीदी बनाए जाने की पहल की जाएगी। साथ ही एक महिला छात्रावास की स्थापना होगी। वहीं, मध्य वर्ग को जहां आयकर में राहत मिली है तो शिक्षा व स्टार्टअप को भी बढ़ावा मिलेगा।
जिलेभर में 7,500 समूह संचालित हैं। इनसे करीब 82 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें लखपति दीदी योजना के तहत 18,568 महिलाओं का चयन किया गया है। आठ हजार महिलाएं लखपति दीदी के रूप में काम कर रही हैं। अब इनके कामों को और विस्तार दिया जाएगा। शी-मार्ट खोले जाएंगे और इसमें उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में और सुधार होंगे, ताकि इन दीदियों को आर्थिक रूप से और सशक्त बनाकर करोड़पति दीदी बनाया जाएगा। हालांकि जिले में शी-मार्ट की तर्ज पर जिले में पहले से ही शहर में आकांक्षा स्टोर है, जो महिलाएं ही संचालित करती हैं। यहां पर 40-50 प्रकार के उत्पादों की बिक्री करती हैं। इससे इनको अच्छी इनकम हो रही है। अब इसी तरह के बड़े स्तर पर शी-मार्ट खोले जाने की तैयारी बजट में की गई है।
वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में बालिकाओं को शिक्षा ग्रहण करने में सुविधा की है। उन्होंने प्रत्येक जिला में महिला छात्रावास खोले जाने की घोषणा की है। इससे बालिकाओं को बाहर पढ़ाई के लिए समस्या नहीं होगी। सुविधा के छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर सकेंगी। इससे आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाएं भी आगे की पढ़ाई कर सकेंगी। उन्हें आर्थिक बाधा नहीं आएगी।
शी-मार्ट की पहल सराहनीय
समूह से जुड़कर काफी महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। उन्हें भी ब्रिक निर्माण यूनिट के कारोबार से जुड़ने का मौका मिला। अब शी-मार्ट की पहल से और भी उपलब्धियां मिलने की आशा है। - तनुजा सिंह, लखपति दीदी।
बजट में महिलाओं के लिए काफी कुछ
समूह के माध्यम से विद्युत सखी के रूप में उसे गांव में ही रोजगार मिला है। उसके माध्यम से गांव वालों को बिल जमा करने की एक सुविधा मिली है। सरकार ने अपने बजट में महिलाओं के लिए काफी कुछ सौगात दी है।
- रेखा, लखपति दीदी।
आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावक अपनी बेटियों की आगे की पढ़ाई नहीं करा पाते हैं। छात्रावास खुलने से लड़कियां पढ़ाई कर आगे बढ़ सकेंगी। - संध्या, छात्रा।
महिला छात्रावास होने से बालिकाओं को पढ़ाई का खर्च कम होगा। स्कूल में ही उन्हें रहने व खाने-पीने की सुविधा होगी। इससे वह अच्छी पढ़ाई कर सकेंगी। - महक सिंह, छात्रा।