अवैध खनन से बेतवा नदी सिकुड़ती जा रही है। यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बुंदेलखंड का किसान एक-एक बूंद पानी को तरसेगा। ट्यूबवेल सूखने लगे हैं। ये बात पूर्व सांसद गंगाचरन राजपूत ने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में कही। उन्हाेंने कहा कि नए साल में वह अवैध खनन के विरुद्ध अभियान चलाएंगे।
रिवर प्रोटेक्शन एक्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि नदी की जलधारा के दोनों ओर 100-100 मीटर की दूरी तक किसी प्रकार की गतिविधि नहीं होनी चाहिए। खनन में हैवी मशीन का प्रयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद माफि या नदियों में पोकलैंड मशीनों से बालू खनन कर रहे हैं।
उन्होंने सांसद तथा विधायकों से अपील की कि वे अपनी निधि का सदुपयोग अन्ना मवेशियों के लिए चारागाह बनवाने में करें। ग्राम समाज की बेकार पड़ी जमीन पर तारबाड़ी लगानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को राहत देने में शासन नाकाम है।
सूखाग्रस्त बुंदेलखंड को चौबीस घंटे बिजली देने का सरकार का दावा हवाई साबित हो रहा है। बमुश्किल 10 घंटे बिजली मिल रही है। यूपी सरकार एमपी सरकार से सीखे जो किसानों को 24 घंटे बिजली दे रही है।
उन्होंने घोषणा की कि नए वर्ष में वह सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, राजनेताओं, कर्मचारियों तथा किसानों के साथ बैठक कर बुंदेलखंड के किसानों और नदियों के लिए संघर्ष की रणनीति बनाएंगे।