हमीरपुर। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत संबद्ध निजी सेंटरों पर गर्भवतियों की निशुल्क अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा सात माह से बंद है। विभाग स्पर्श पोर्टल में खामी को वजह बता रहा है। बड़ी संख्या में गर्भधात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरी में ये निजी केंद्रों पर 500-600 रुपये देकर जांच करा रहीं हैं।
एनएचएम से बजट जारी न होने के कारण यह संकट है। अनुमान के मुताबिक, बीते छह माह में करीब तीन हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांचें नहीं हाे सकीं हैं। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना का हाल बदहाल है। योजना के तहत 10 सरकारी सेंटरों में आने वाले मरीजों की निशुल्क जांच 15 निजी पैथोलॉजी में कराए जाने की सुविधा दी गई थी। स्पर्श प्रणाली में सुधार न होने से गर्भवतियों को निजी लैबों पर पैसा खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। जुलाई माह से सॉफ्टवेयर अपडेट के चलते किसी को ई-वाउचर नहीं मिल पा रहा है। हर माह इसका खामियाजा करीब 400-500 गर्भवतियों को भुगतना पड़ रहा है।
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ऐसे मिलती सुविधा
प्रधानमंत्री मातृत्व योजना में गर्भवतियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 425 रुपये का ई-वाउचर जारी किया जाता है। ई-वाउचर मिलने के बाद एक क्यूआर कोड आता है। इसको स्कैन करने पर निजी केंद्र के खाते में पैसा चला जाता हैं। इससे गर्भवती महिलाएं चिह्नित अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच कराती हैं। स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल में जुलाई से चल रहे अपडेट के कारण वाउचर जेनरेट नहीं हो पा रहे हैं। वाउचर न मिलने से सेंटर संचालकों ने निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा रोक दी है।
प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जाती है लेकिन यह व्यवस्था बीते सात माह से ठप है। स्पर्श पोर्टल पर खामी के चलते समस्या आ रही है। चार माह से जननी सुरक्षा के तहत करीब एक हजार प्रसूताओं का भी भुगतान अटका है।
डॉ. गीतम सिंह, सीएमओ।