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Hamirpur News: उत्पीड़न के दो दोषियों को चार-चार साल की सजा

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हमीरपुर। दलित उत्पीड़न, मारपीट और धमकी के मामले में करीब 18 साल बाद फैसला आया। एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर कुल 18 हजार जुर्माना लगाया है। साथ ही पीड़ित को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।
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शहर कोतवाली के मोहल्ला नौबस्ता निवासी बलराम ने थाना पुलिस को 21 मई 2006 को शिकायती पत्र दिया था। आरोप लगाया था कि पुत्र सोनू को निजाम, बंटी, रसूल, अली व जाकिर अपने साथ मोटरसाइकिल से ले गए। आरोप है कि रास्ते में उसके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई और उसे गंभीर हालत में छोड़ दिया गया। बाद में उसका इलाज अकबरपुर और कानपुर के अस्पतालों में कराया गया।
वादी का आरोप था कि घटना की शिकायत पुलिस समेत उच्चाधिकारियों से की गई लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 14 सितंबर 2007 को आरोपी उसके घर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। न्यायालय के आदेश पर 16 जुलाई 2008 को कोतवाली में निजाम, बंटी, रसूल, अली और जाकिर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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विवेचना के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अंतिम आख्या लगा दी थी। इस पर वादी बलराम ने न्यायालय में विरोध प्रार्थना पत्र दाखिल किया। तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर निजाम और बंटी को तलब किया गया और दोनों के खिलाफ मुकदमे का विचारण शुरू हुआ। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सजा सुनाई।
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