फोटो07एचएएमपी 03 मुशायरे में कलाम पेश करते शायर। संवाद
मौदहा (हमीरपुर)। नगर में रविवार को मुशायरे का आगाज किया। मास्टर तकी ने पढ़ा वक्त हर शख्स को आईना दिखा देता है। इसके बाद मंच पर मौजूद शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम व शेर पेश कर श्रोताओं की वाह वाही लूटी। कार्यक्रम में अब्दुल इस्लाम द्वारा शायर मसीह निज़ामी को सम्मानित भी किया गया।
मोहल्ला हुसैनगंज स्थित मास्टर फख़रुद्दीन यावर के आवास पर बज्में-करीम मौदहा के बैनर तले माहाना तरही मुशायरा आयोजित हुआ। मुशायरे की अध्यक्षता रमजान खां साहिल ने की, संचालन मशहूर शायर मसीह निजामी ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ममनून अहमद बंगश रहे। बदरुद्दीन तायब ने शेर पढ़ा रेत पर कितनी भी ऊंची तू इमारत कर ले, एक तूफान उसे पल में गिरा देता है। मुख्य अतिथि ममनून अहमद बंगश ने पढ़ा खासियत एक तबस्सुम की सुनो ऐ जाना, दिल के वीराने में जुगनू सा जला देता है।
मसीह निजामी ने पढ़ा अपने जहनों में कभी जंग न लगने देना, जंग वो शय है जो लोहे को गला देता है। यावर मौध्वी ने शेर पेश किया देखिए तो जरा ये नादानी, चांद तकते हैं दोपहर वाले। साहिल मौध्वी ने कहा राजनीत से राज रह जाएगा नामुमकिन, जब इधर से मिले उधर वाले।
इसके अलावा आकिल बिजनौरी, कमर निजामी, निजाम, मुन्ना बॉर्डर, वीरेंद्र कुमार शाजर हमीरपुर, फरीद परछवी समेत अन्य शायरों ने कलाम पेश किए।