चरखारी (महोबा)। कस्बा चरखारी के ऐतिहासिक मंगलगढ़ किले में रखी बेशकीमती अष्टधातु की तोप को शनिवार की सुबह एक युवक आरी से काटकर चुराने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने युवक को दौड़ाकर पकड़ लिया। आरोपी ने रियासतकालीन तोप को लगभग काटकर अलग ही कर दिया था कि तभी सुरक्षाकर्मी वहां पहुंच गए। पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
कस्बा चरखारी स्थित मंगलगढ़ किले में पिछले दो महीने से प्रशासन ने स्थानीय लोगों व पर्यटकों के आने-जाने पर सुरक्षा की दृष्टि से रोक लगा रखी है जबकि किले में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। पर्यटकों का आवागमन न होने से किले में सन्नाटा रहता है। इसी का लाभ उठाते हुए एक युवक किले में प्रवेश कर गया और वहां रखी अष्टधातु की तोप (धरती धमकन) को आरी से काटने में लगा।
किले के मुख्य द्वार पर तैनात होमगार्ड व पालिका कर्मी किले पर गश्त करने पहुंचे तो तोप काट रहा युवक उन्हें देखकर भागने लगा। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों ने उसे घेरकर पकड़ लिया और पिटाई कर दी। उसके पास से दो बैग मिले। जिसमें खाने-पीने की चीजें व आरी, ब्लेड मिला। सुरक्षाकर्मियों ने इसकी जानकारी नगर पालिका प्रशासन को दी और आरोपी युवक को पुलिस को सौंप दिया।
नगर पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि रामलाल कुशवाहा, वरिष्ठ लिपिक अयूब खां, किले के कर्मचारी शेख गफ्फार और लिपिक संजीत कुमार थाने पहुंचे। लिपिक संजीत कुमार ने आरोपी के खिलाफ चरखारी थाने में तहरीर दी। आरोपी गोरखपुर जनपद के खैरखुरा डुमरईला निवासी रजनीकांत मिश्रा बताया गया। कोतवाल प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया।
किले में पीछे के रास्ते से घुसा था रजनीकांत
पुलिस की पूछताछ में आरोपी रजनीकांत ने स्वीकारा कि वह रात के समय किले में पीछे की दीवार की ओर से आया था और तोप को काटने में लग गया था। सुबह वह अपने काम को समाप्त करने के करीब था तभी सुरक्षाकर्मी वहां आ गए। उसने बताया कि उसका एक साथी भी आया था जो चोरी करने में साथ था लेकिन सुबह दूसरे कार्य से चला गया था।
15 फीट लंबी है रियासतकालीन तोप धरती धमकन
नगर पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि रामलाल कुशवाहा ने बताया कि आरोपियों ने तोप को लगभग पूरा काट ही दिया था। आंशिक रूप से तोप जुड़ी हुई है। काफी क्षतिग्रस्त होने से ऐतिहासिक तोप के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। यह तोप रियासतकालीन है और करीब 15 फीट लंबी है। यह अष्टधातु से निर्मित है। इससे यह बहुत ही कीमती भी है। उन्होंने बताया कि किले के पीछे के गेट पर होमगार्ड और पालिका कर्मचारी की ड्यूटी रहती है। चोरों ने खंदिया की ओर से गई सड़क व दरवाजे का प्रयोग अंदर आने के लिए किया है और दूसरा आरोपी इसी रास्ते से वापस निकल भी गया। बताया कि रियासतकाल में 1857 में तात्या टोपे ने 15 दिन तक चरखारी किले को घेरकर रखा लेकिन इस किले में प्रवेश नहीं कर सके थे।