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Hamirpur News: राखी के धागों में बंधा भाई-बहन का अटूट प्यार, उल्लास से मना रक्षाबंधन

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फोटो28एचएएमपी-18 सुमेरपुर में भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन।सूत्र संवाद
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फोटो28एचएएमपी-18 सुमेरपुर में भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन।सूत्र संवाद
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फोटो28एचएएमपी-19 शहर में भाई को राखती बहन। संवाद

बहनों ने लंबी आयु की कामना की, भाइयों ने लिया रक्षा का संकल्प


संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में उत्सव जैसा माहौल रहा। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी और उनकी कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर हर सुख-दुख में साथ निभाने और उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
पंचांग के अनुसार इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया गया। पूर्णिमा तिथि सुबह करीब 9:48 बजे तक रही। रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो गई थी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सुकर्मा योग रहा और शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बताया गया। सुबह शुभ मुहूर्त में बहनों ने पूजा की थाली सजाई। भाई के माथे पर रोली-चंदन का तिलक लगाया, आरती उतारी और कलाई पर राखी बांधी। राखी बांधने के बाद बहनों ने भाइयों का मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेरी।
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रक्षाबंधन को लेकर सुबह से ही बाजारों में खास रौनक दिखाई दी। राखियों, मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। रंग-बिरंगी राखियों से सजी दुकानों ने लोगों का ध्यान खींचा। बहनों ने भाइयों की पसंद के हिसाब से राखियां खरीदीं तो बच्चों में भी कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों को लेकर उत्साह रहा।
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दूरियों पर भारी पड़ा रिश्तों का प्यार
रक्षाबंधन पर वर्षों बाद कई बहनें अपने मायके पहुंचीं तो घर-आंगन खुशियों से भर उठा। नौकरी और शादी के बाद दूसरे शहरों में रहने वाली बहनों के आने से माता-पिता और भाई भी भावुक नजर आए। कहीं बहनें सुबह-सुबह बस और निजी वाहनों से मायके पहुंचीं तो कहीं भाई खुद बहनों को लेने पहुंचे। कई परिवारों में भाइयों की कलाई पर राखी बांधते समय बहनों की आंखें भी नम हो गईं।
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सुमेरपुर के कुछ गांवों में शनिवार को मनेगा पर्व
भरुआ सुमेरपुर। कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार को रक्षाबंधन परंपरागत ढंग से मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी सुख-समृद्धि की कामना की।
वहीं ब्लॉक क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों में रक्षाबंधन पूर्णिमा के बजाय परेवा यानी प्रतिपदा को मनाने की परंपरा आज भी कायम है। इन गांवों में शनिवार को बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी।
स्थानीय मान्यता के अनुसार एक दिन बाद रक्षाबंधन मनाने की यह परंपरा क्षेत्र की ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी मानी जाती है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा कुछ ग्राम पंचायतों में आज भी कायम है।

राखी बाजार में रही चहल-पहल
रक्षाबंधन को लेकर शहर और कस्बों के बाजारों में दिनभर चहल-पहल रही। राखी की दुकानों पर बहनों ने पसंद की राखियां खरीदीं। मिठाई और उपहार की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रही। बहनों ने भाइयों के लिए राखी के साथ मिठाई और उपहार भी खरीदे।
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भद्रा से मुक्त रहा रक्षाबंधन


राखी के साथ मिठाई का कारोबार
हमीरपुर : करीब 20 लाख रुपये
राठ : करीब 10 लाख रुपये
बिवांर : करीब 2.5 लाख रुपये
सरीला : 2 लाख रुपये से अधिक
कुल : 34.5 लाख रुपये से अधिक
नोट : आंकड़े स्थानीय व्यापारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अनुमानित हैं।

फोटो28एचएएमपी-18 सुमेरपुर में भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन।सूत्र संवाद

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