एटीएम से नई करेंसी निकलने से लोगों को थोड़ी राहत मिली है। गुरुवार को जरूरतमंदाें ने दस हजार रुपये तक की निकासी की, इससे उन्हें भी राहत मिली है। हालांकि पुराने नोट बदलने को लेकर बैंकों में अभी भी लंबी कतारें लग रही हैं। बैंकाें में स्टाफ की कमी से काउंटर कम लग पा रहे हैं।
नोट बदलने वालों की लंबी लाइनें लगी मिली। लाइन में लगे लोग बैंक कर्मियों को कोसते दिखे। बैंक में धक्का-मुक्की कर करीब 50 लोग अंदर जा घुसे। जिन्हें काबू में करने में गार्ड नरेंद्र सिंह यादव भी धक्का-मुक्की का शिकार हो गए। शाखा प्रबंधक रमेशचंद्रा ने बताया कि स्टाफ में उनके अलावा एक मात्र सहायक है। उन्हें ही सब काम देखना पड़ रहा है। फिर भी प्रतिदिन 200 से 250 लोगों के नोट बदले जा रहे हैं। शादी व बीमारी होने पर जरूरत के अनुसार दस हजार तक का भुगतान भी किया जा रहा है।
इलाहाबाद बैंक, सरीला के बाहर लंबी लाइन लगी मिलीं। लोगों ने बताया कि नोट बदलने के लिए घर का सारा काम छोड़ना पड़ रहा है। बैंक कर्मियों ने केवल एक काउंटर लगाया है। जिससे परेशानी होती है। यहां और काउंटर बढ़ने चाहिए। यहां के शाखा प्रबंधक जीशान सिद्दीकी व सहायक प्रबंधक राजकमल ने बताया कि अब मारामारी कम हुई है। कैश की कमी है। फिर 250 से 300 लोगों का लेन-देन किया जा रहा है। शादी का कार्ड व बीमारी के पर्चे दिखाने पर दस हजार दिए जा रहे हैं।
एसबीआई एटीएम, सरीला थोड़ी देर चलने के बाद ठप हो रहा था। लाइन में लगे याशीन, अकरम, शेखू अली, नरेश, धीरेंद्र, कमलेश आदि का आरोप है कि बैंक कर्मी एटीएम खराब होने का बहाना कर बंद कर देते हैं और अपने चहेताें के आने पर खोलते हैं। जबकि शाखा प्रबंधक रमेशचंद्रा ने बताया कि एटीएम में पुराने नोट होने के कारण दो चार ट्रांजेक्शन के बाद नोट फंसने की समस्या आ रही है। जिससे एटीएम बंद करना पड़ता है। इस समस्या से उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
टोकन बंटने से कम हो सकती है परेशानी
नोटबंदी के फैसले का बाद बैंकों के अंदर व बाहर लोग निकासी व नोट बदलवाने के लिए लाइन लगाए खड़े हैं। अव्यवस्थाओं से परेशान लोगों का कहना है कि अगर बैंक टोकन देने लगे तो लोगों को लंबी लाइन से छुटकारा मिल सकता है। तय समय पर आने से उसका काम कम समय में ही होने लगेगा। इससे बैंकों के बाहर लाइनें भी कम लगेंगी।
कस्बे के योगेश गुप्ता का कहना है कि लंबी लाइनें लगवाने की बजाए टोकन नंबर वितरित कर दिए जाएं। जिसके अनुसार लोग बैंकाें में पहुंचकर कम समय में नोट बदलने व जमा करने का काम कर सकते हैं। सौखर के किसान मुन्नालाल प्रजापति ने बताया कि बाजार में पुराने नोट कोई नहीं ले रहा है और बैंकाें में लंबी लाइनें लग रही हैं। लोगों का कहना है कि अगर नोट बदलने की प्रक्रिया बंद कर दी जाए। सिर्फ खातों में जमा कराया जाए। तो लाइनें छोटी हो सकती हैं। क्योंकि कुछ काला धन रखने वाले लोग मजदूरी पर लोगों को लगाकर नोट बदलवाने का काम कर रहे हैं।
पंधरी गांव के किसान नवीन सिंह ने बताया कि खेतों में पलेवा हो चुका है और बुआई के लिए खेत भी तैयार हैं। लेकिन नोट बंदी के कारण बैंकाें में लाइन लगाने से बुआई का समय निकला जा रहा है। वहीं पुराने नोटों के बदले नई करेंसी न मिलने से खाद बीज नहीं ले पा रहे हैं। टेढ़ा के किसान प्रिंसू सिंह ने बताया कि नोट बदलने के लिए वह कई दिन से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन लंबी लाइन होने के कारण समय बर्बाद हो रहा है।
स्याही लगाने के आदेश के बाद कम हुई भीड़
बैंकों में नोट बदलने व निकालने वालों की अंगुली में स्याही लगाने के आदेश आने के बाद बैंकाें में भीड़ कम नजर आ रही है। काला धन बदलाने के लिए लाइनों में लगने वाले लोग गुरुवार को बैंकाें के आसपास नजर नहीं आए। जिससे खाता धारकाें ने राहत की सांस ली। कस्बे के किसी भी शाखा में अभी तक स्याही तो उपलब्ध नहीं हुई। लेकिन स्याही लगाए जाने का फरमान का असर जरूर दिखाई दिया। बीते कई दिनों से कस्बे के कुछ पूंजीपति सुबह से किराए पर मजदूरों को लाकर खड़ा कर देते थे। जिसमें शाखा प्रबंधकों की मिली भगत से भी नोट बदलवाने का गोरखधंधा चल निकला था। लेकिन गुरुवार को आरबीआई के आदेश से लंबी लाइनें नहीं लग सकीं।
लाइन से हटकर भुगतान पर ग्रामीणों ने किया हंगामा
ग्रामीण बैंकाें में बुधवार से धन मिलने पर लोगों ने राहत की सांस ली। दूसरी ओर इलाहाबाद बैंक में लाइन से हटकर भुगतान कराने पर ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा। मामला पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ। गांव के इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में नई करेंसी किसी को नहीं मिली। 100 के नोट जरूर प्रति खाताधारक एक हजार रुपये उनके खातों से निकाले गए।
गांव के लखनलाल द्विवेदी ने बताया कि आरबीआई के निर्देशानुसार उनको भुगतान नहीं किया जा रहा है। केवल दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जिससे उनका काम नहीं चल पा रहा है। इस बारे में शाखा प्रबंधक रामसनेही यादव ने बताया कि धीरे-धीरे सबको कैश दिया जाएगा। बैंक में अभी कम कैश आ रहा है। उधर, क्षेत्र इमिलिया गांव के इलाहाबाद बैंक में भी रुपये मिलने लगे हैं। लेकिन यहां बैंक के कर्मचारी दलालों के माध्यम से चेहरा देखकर लाइन से हटकर भुगतान करने पर लोगों ने विरोध किया। बाद में सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।