तेजतर्रार माने जाने वाले पुलिस अधीक्षक मुनीराजजी का शासन ने पीलीभीत स्थानांतरण कर दिया। अपनी ईमानदार छवि के चलते उन्होंने सत्ता पक्ष के नेताओं की सिफारिशों को नजरंदाज किया। 27 जनवरी को मुख्यालय आए सीएम अखिलेश यादव तक से सपाइयों ने हटाने की बात कही। लेकिन जब सीएम ने ईमानदार अधिकारी होने की बात कही तो दिग्गजों के मुंह बंद हो गए।
पुलिस अधीक्षक मुनीराज जी ने सितंबर माह में जिले का कार्यभार संभाला था। खेल के प्रति उनका लगाव अधिक था। सुबह से साइकिल पर मार्निंग वाक करना उनकी आदत में शुमार था। वह प्रतिदिन टहलते हुए कभी थाना कुरारा तो कभी थाना सुमेरपुर तक पहुंच जाते थे।
कार्यालय में बैठकर फरियादियों की बात को गंभीरता से सुनने के बाद त्वरित कार्रवाई के निर्देश थानेदारों को देना उनके काम में शामिल रहा। उन्होंने साइबर क्राइम के मामलों में कई कार्रवाइयां की। अभी बीते पखवारे मौदहा में एटीएम का कोड लेकर लाखों रुपये निकालने पर नारायच गांव के दो लोगों की गिरफ्तारी कर मुकदमा दर्ज कराया।
साथ ही कई लोगों के निकाले गए बैंक खाते के धन को वापस कराने में सफलता पाई। वह बिना किसी दवाब के काम करना ज्यादा पसंद करते थे। मारपीट के मामले में जहां विधायक के बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया तो वहीं सपा नेताओं के मना करने के बाद भी पुलिस से भिड़े लोगों को जेल भेजने का काम किया।
पुलिस अधीक्षक से नाराज कुछ सपाइयों ने बीते 27 जनवरी को मुख्यालय आए सीएम के समक्ष पुलिस अधीक्षक के खिलाफ आवाज उठाई लेकिन सीएम ने तत्काल पलटकर कहा कि एक ईमानदार अधिकारी को नहीं पचा सकते हो इससे सपाई बगले झांकने लगे। एसपी की कार्यशैली से आम जनता प्रभावित थी। शासन ने नौ माह तक रहे पुलिस अधीक्षक मुनीराज जी को पीलीभीत भेजा है। जबकि पीलीभीत में तैनात अनिल कुमार सिंह को जिले की कमान सौंपी है।