गुरुवार को विजय दशमी पर परेड ग्राउंड भी रावण का पुतला जलते ही जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। दशहरा मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए बाहरी और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था इस बार पहले की अपेक्षा अधिक पुख्ता की गई। कोतवाल पीके यादव ने बताया कि त्योहार को सकुशल संपन्न कराने व शोहदाें पर लगाम लगाने के लिए परेड ग्राउंड में दस उपनिरीक्षक, एक इंस्पेक्टर, 20 सिपाही, 10 सिविल ड्रेस सिपाही व 10 महिला कांस्टेबिलों के अलावा परेड के बाहर शहर में कालपी चौराहा, रहुनिया चौकी, पेट्रोल पंप, बस स्टॉप, अकिल तिराहा, किंग रोड़ तिराहा, सूफीगंज चौराहा, रमेड़ी तिराहा व लक्ष्मीबाई तिराहा में भी फोर्स लगाई गई। वहीं, मोबाइल टीम भी पूरे दिन सक्रिय रही।
सुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में विजय दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर दशहरा की शुभकामनाएं दीं। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। वहीं, कस्बे के रामलीला मैदान में दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। जहां लोगों ने एक दूसरे से मिलकर बुराई पर अच्छाई की जीत पर दशहरे की शुभकामनाएं दीं।
वहीं, ग्रामीण इलाकाें में लोग एक दूसरे के घरों में जाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। खेत खलिहानों में जाकर नीलकंठ के दर्शन किए। देर शाम गायत्री तपोभूमि में विशाल रावण का पुतला फूंका गया। रावण का पुतला फूंक कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के आधा दर्जन स्थानों पर रावण का प्रतीक पुतला दहन किया गया। तीन स्थानों पर बड़े रावण तैयार किए गए और इन स्थानों से रामलला के विमान के साथ झांकियां निकाली र्गइं।
सबसे बड़ा रावण कुम्हरौड़ा मोहल्ला में 46 फीट ऊंचा खड़ा किया गया। यहां से जुलूस भी बेहद उत्साह पूर्वक एक दर्जन से अधिक झांकियों के साथ ढोल, मजीरा संग निकला। इसी तरह नेशनल मार्ग रामनगर, केवन बब्बा, मराठीपुरा में बड़े रावण तैयार किए गए। यहां से भी रामलला का विमान निकाला और देर रात रावण वध के साथ दशहरा मिलन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके अलावा स्थानीय कई मोहल्लों के बच्चों व युवाओं द्वारा छोटे-छोटे रावण के पुतले तैयार कर उनका दहन किया गया।
क्षेत्र में दशहरा का त्योहार हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। शाम को लोगों ने एक दूसरे से मिल दशहरे की शुभकामनाएं दीं। त्योहार को लेकर मिठाईयों की दुकानों पर भीड़ रही। गुरुवार को दशहरा पर्व पर पूरे दिन त्योहार की बधाई देने का सिलसिला चलता रहा। बाजार में पर्व को लेकर मिठाई बेचने वाले दुकानदारों की चांदी रही।
खास तौर से ग्रामीण क्षेत्र में इस पर्व का विशेष महत्व रहा। बता दें कि दशहरे का त्योहार एक दिन का नहीं होता। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है। आज के दिन लोग एक दूसरे के घर जाकर विजय दशमी की बधाई देते हुए पान खिलाते हैं। बता दें कि कस्बे में दशहरा पर्व पर रावण का दहन नहीं होता। रावण दहन दीपावली में किया जाता है। जिसके चलते लोगों में पर्व को लेकर उत्साह कम दिखता है।
वहीं, महंगाई ने भी इस पर्व को फीका कर दिया। पहले लोग महीनों पहले दशहरे के त्योहार की तैयारियां शुरू कर देते थें। ऐसा कोई घर नहीं था, जहां पर लोग एक दूसरे के यहां न जाएं। महिलाएं हफ्तों पहले घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाने की तैयारियां शुरू कर देती थीं। समय बदलने से त्योहारों की भी रंगत बदल गई। आज के समय त्योहार सिर्फ रस्म अदायगी रह गए हैं। दो दशक पहले मिठाई तथा पान की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ती थी, आज सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है।