राठ। मंगरौठ जागीर के जमींदार दीवान शत्रुघ्न सिंह द्वारा अंग्रेज कलक्टर के सामने चंदा देने से इन्कार करने पर सभा में सन्नाटा छा गया। तहसीलदार ने कड़कदार आवाज में पूछा इसका अंजाम जानते हो। दीवान साहब ने कहा जानता हूं, मिटने को तैयार हूं। यह कहते हुए सभा छोड़कर बाहर निकल आए।
हमीरपुर जिले के मंगरौठ गांव के दीवान शत्रुघ्न सिंह ने स्वतंत्रता की लड़ाई में बड़ा योगदान दिया है। इनका जन्म 25 दिसंबर 1900 में हुआ था। देश में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। सन 1914 में जर्मनी और इंग्लैंड के बीच प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हो चुका था। देश पर शासन कर रही अंग्रेजी हुकूमत जमीदारों, सेठ, साहूकारों व राजाओं से युद्ध के लिए चंदा वसूल रही थी। 1916 में अंग्रेज कलक्टर की सदारत में राठ तहसील में सभी जमींदारों की बैठक बुलाई गई। बैठक में नाम पुकारे जाने पर जमींदार अधिक से अधिक चंदा देने की हामी भर रहे थे। अंग्रेज कलक्टर के सामने मंगरौठ के दीवान शत्रुघ्न सिंह से पूछा गया आप कितना चंदा देंगे। इस युवा जमींदार ने निर्भीकता से कहा एक भी पैसा नहीं, जिस अंग्रेजी शासन से सारी पृथ्वी थर्राती थी। उसके सामने दीवान का यह उत्तर सुनकर सभा में सन्नाटा पसर गया। तहसीलदार ने जमींदारी मटियामेट करने की धमकी दी। दीवान ने भी उसी लहजे में जवाब दिया, जानता हूं, मिटने को तैयार हूं। तहसील के बाहर निकलते ही क्रांतिकारी मूलचंद्र शर्मा व मातादीन बुधौलिया ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। बाजार से उनके आवास तक जय जयकार करते हुए जुलूस निकाला गया।