हमीरपुर। जिला अस्पताल की पैथोलाॅजी में चौथे दिन बायोकेमिस्ट्री मशीन ठीक हो सकी। दो इंजीनियर तीन दिन तक मशीन ठीक करने में जुटे रहे। सोमवार को प्रयागराज से आए तीसरे इंजीनियर ने मशीन को ठीक किया है। इससे बीते चार दिन लीवर, किडनी, कोलेस्ट्राल, शुगर आदि जांचे ठप रहीं।
बता दें कि बीते शुक्रवार को बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब हो गई थी। कानपुर से आए दो इंजीनियर तीन दिनों तक मशीन को ठीक करने में जुटे रहे। लेकिन, मशीन को सही नहीं कर सके। सोमवार को प्रयागराज से इंजीनियर को बुलाया गया। दोपहर करीब दो बजे आए इंजीनियर ने एक घंटे में मशीन को ठीक कर दिया, तब कहीं जाकर लीवर, किडनी, कोलेस्ट्राल, शुगर आदि शुरू हो सकीं।
सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 866 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें 412 पुरुष, 314 महिला व 140 बच्चों के पर्चा बनाए गए। डॉक्टरों ने मरीजों को देखकर जांचें लिखीं, लेकिन बायोकेमिस्ट्री जांचे नहीं हो सकीं। इसके लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ा। इस मशीन से मरीजों की लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (टीएफटी), कोलेस्ट्राल की जांच (लिपिड प्रोफाइल), शुगर व शरीर में इंफेक्शन (ईएसआर) आदि जांचें होती हैं। मशीन में आई खराबी के कारण यह सभी जांचें चार दिनों से पूरी तरह ठप हैं। इससे मरीजों को महंगे दामों पर जांचे करानी पड़ रही हैं। तीमारदार रामू सिंह ने बताया कि बेटे को कई दिनों से तेज बुखार आ रहा था। मशीन खराब होने के कारण लीवर व किडनी की जांच नहीं हो सकी थी। मजबूरन बाहर से साढ़े 900 रुपये देकर जांच करानी पड़ी। वहीं, मरीज दिनेश कुमार ने बताया कि मशीन खराब होने के कारण निजी पैथालॉजी से एक हजार रुपये देकर जांच कराई है।
कानपुर से आए दो इंजीनियर तीन दिन तक मशीन ठीक करते रहे, लेकिन मशीन सही नहीं कर पाए। सोमवार को प्रयागराज से आए इंजीनियर से मशीन को ठीक कराया गया है। -डॉ. महेंद्र, लैब प्रभारी।