सुमेरपुर मंडी में पसरा सन्नाटा।
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नोट बंद होने की जबरदस्त चोट नवीन गल्ला मंडी के कारोबार को लगी है। व्यापार पूर्णतय: ठप हो जाने से दस दिन में नवीन गल्ला मंडी परिषद को लगभग आठ लाख रुपये के राजस्व की हानि हुई है। दस दिन में व्यापारियों का लगभग चार करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ है। इस मंडी में व्यापारी प्रतिदिन लगभग 40 लाख रुपये का व्यापार करते रहे हैं। मंडी का कारोबार बंद होने से इससे जुड़े पल्लेदार व बिचौलिया कंगाल हो गए हैं। अगर यहीं आलम बना रहा तो यहां से विदेशों तक जाने वाली सफेद ज्वार का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
नवीन गल्ला मंडी के सचिव देवकुमार पोरवाल ने बताया कि नोट बंदी के फैसले के बाद गल्ला मंडी के कारोबार में पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पिछले दस दिन में मंडी परिषद को करीब आठ लाख रुपये के राजस्व की क्षति हुई है। प्रतिदिन करीब 40 लाख रुपये का कारोबार होता है। अब तक करीब चार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। नवंबर का अंतिम पखवारे व दिसंबर माह में यहां पर ज्वार का कारोबार बड़े पैमाने पर होता हे।
इस मंडी से कानपुर, फतेहपुर, जालौन, महोबा, छतरपुर सहित अन्य जनपदों से ज्वार आती है। सफेद ज्वार की डिमांड विदेशों तक होती है। यहां से पाकिस्तान, सउदी अरब, अफगानिस्तान आदि देशों को ज्वार जाती है। इस कारोबार से मंडी परिषद को अच्छा खासा राजस्व प्रतिवर्ष हासिल होता है। लेकिन अचानक नोट बंदी का फैसले से इस कारोबार की तैयारियों को तगड़ा झटका लगा है।
व्यापारी रामरूप शिवहरे, श्याम बिहारी पांडेय, बरदानीलाल गुप्ता, महेश गुप्ता, उदित नारायन तिवारी आदि ने बताया कि इस वर्ष ज्वार का कारोबार शिथिल रहने की संभावना है। आढ़तों के शटर पूरी तरह बंद हैं। कारोबार बंद होने से इनके समक्ष अब दो जून रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।