मौदहा में सीएचसी में बेड पर पड़ा बुखार पीड़ित
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हिमौली गांव में बुखार से वृद्ध की मौत हो गई। उसकी मौत की सूचना पर घर आ रहा उसका छोटा बेटा मुंबई से चला और भोपाल के निकट ट्रेन हादसे का शिकार हो गया। उसका शव रेल पटरी पर पड़ा मिला। पिता के बाद बेटे की मौत की सूचना मिली तो घर में हाहाकार मच गया। गांव में भी मातम छा गया
बिवांर क्षेत्र के हिमौली गांव निवासी इकबाल अहमद (70) पुत्र मंजदूर अहमद का बुखार आने पर गांव में इलाज चलता रहा लेकिन ठीक नहीं हुआ। इस पर वह अपनी बेटी के यहां चरखारी चला गया। हालत बिगड़ी, तो उसे महोबा जिला अस्पताल ले जाया गया। डाक्टरों ने जवाब दे दिया तो परिजन उसे घर ले आए। बुधवार की रात उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर मुंबई में रह रहा छोटा बेटा छोटू (17) पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ट्रेन में आ रहा था। भोपाल के आगे सलामतपुर रेलवे स्टेशन के निकट रेल पटरी पर उसका शव मंगलवार रात पड़ा मिला। उसके मोबाइल से घर में सूचना दी गई। भोपाल में रह रहे उसके रिश्तेदार पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर गुरुवार को गांव आए। जहां बुधवार को पिता इकबाल को सुपुर्दे खाक किया गया वहीं गुरुवार को बेटे छोटू का अंतिम संस्कार किया गया। दो-दो मौतों से घर में हाहाकार की स्थिति है, पूरा गांव गमजदा है।
वहीं पाटनपुर गांव में सैकड़ों की संख्या में संक्रामक रोगों की चपेट में आए ग्रामीण कर्ज ले-लेकर इलाज करा रहे हैं। इस गांव में बीते एक पखवारे में चार मौतें बुखार से हुई हैं। पाटनपुर गांव के प्रधान कौशल किशोर व महेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की आबादी पांच हजार है। कहा कि हर घर में लोग संक्रामक बीमारियों से पीड़ित हैं। बताया कि बीते 15 दिन के अंदर चार मौते हो चुकीं हैं। छोटे (60) की इलाज के दौरान सरकारी अस्पताल में मौत हुई थी। उसे चिकनगुनिया था। रामचरन कछवाहा (65) की दो दिन पूर्व सरकारी अस्पताल में, जयसिंह (54) की गांव में मौत हो गई। इसी तरह गांव के बड़े कुशवाहा की 63 वर्षीया मां की तीन दिन पूर्व बुखार से मौत हो गई थी। गांव के एक दर्जन से ज्यादा लोग कानपुर में इलाज करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के गांव न पहुंचने पर झोलाछाप डाक्टर मरीजों की जेबें खाली कर रहे हैं। सीएचसी के अधीक्षक डा.अनिल सचान ने बताया कि 400-500 मरीज प्रतिदिन अस्पताल में देखे जा रहे हैं। अस्पताल में जितने बेड हैं, सब भरे होने के कारण बेंच, स्ट्रेचर व जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ता है।