परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के साथ हर गरीब बच्चे को शिक्षा दिलाने के लिए शासन प्रयास कर रहा है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से ऐसा संभव नहीं हो रहा है।
जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) की खरीद में कंजूसी की जा रही है।
शासन ने शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। इसमें छोटे बच्चों को खिलौनाें के माध्यम से बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए टीएलएम (टीचर लर्निंग मैटेरियल) योजना शुरू है। जिसमें विद्यालयों को खिलौने, बाल्टी, दरी, जग बर्तनों सहित बीस प्रकार के सामान खरीदने के लिए बजट जारी किया गया।
इसमें ज्यादातर प्रधानाध्यापकाें, एसएमसी अध्यक्षों व अधिकारियों ने बजट का सही उपयोग नहीं किया है। हालांकि विद्यालयों में बिल बाउचर लगाए हैं। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्राें को अभिनव प्रयोग के लिए विज्ञान की किट खरीदने के लिए हर वर्ष बजट जारी किया जा रहा है।
बीते दिनों जिलाधिकारी विशाखजी के औचक निरीक्षण में यह बात सामने आई। इसे गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच सरीला के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जोगिंदर सिंह आईएएस को सौपी है। मामले की तह में जाने के लिए जांच अधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से पांच वर्षों के अभिलेख मांगे हैं।
गरीब नौनिहालाें क ो शिक्षा से जोड़ने प्रयासों में लापरवाही बरती जा रही है। यही कारण है कि बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष पंजीकृत छात्राें की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2015-16 में जिले में परिषदीय व मान्यता प्राप्त कुल 1894 विद्यालयों में एक लाख 96 हजार 592 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। वहीं वर्ष 2016-17 में विद्यालयों की संख्या बढ़कर 1962 तो हो गई लेकिन छात्र संख्या घटकर एक लाख 91 हजार 421 रह गई।
उन्होंने अभी चार्ज संभाला है। कहा कि विज्ञान किटों की खरीद के लिए पूर्व में बजट विद्यालयों को जारी किया गया है। कहा कि लेखाधिकारी शरद कुमार वर्मा को किट संबंधी जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
डा.चंद्रशेखर मालवीय, प्रभारी बीएसए