महोबा। लोकसभा चुनाव के पहले समाजवादी पार्टी को करारा झटका लगा है। पूर्व मंत्री सिद्धगोपाल साहू ने भाजपा का दामन थाम लिया है। उन्हें लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने पार्टी की सदस्यता दिलाई।
कस्बा कबरई निवासी सिद्ध गोपाल साहू पढ़ाई के समय से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने राजनीतिक कॅरिअर की शुरूआत बसपा के टिकट पर वर्ष 1995 में नगर पंचायत अध्यक्ष कबरई का चुनाव जीतने के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने सपा का दामन थामा। तब वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने महोबा सदर सीट से चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने बसपा प्रत्याशी चंद्र नारायण को हराया था। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम यादव की सरकार में उन्हें खनिज राज्यमंत्री बनाया गया था। मुलायम सिंह सरकार में ही उन्हें यूपीएसआईडीसी का अध्यक्ष बनाया गया।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सपा ने सिद्ध गोपाल साहू का टिकट काटकर पूर्व सांसद गंगाचरण के भाई गिरजा चरण को दे दिया। तब सिद्ध गोपाल साहू ने नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उनकी करारी हार हुई थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें फिर से टिकट दिया। तब वह 355 वोट से चुनाव हार गए थे। अब लोकसभा चुनाव के पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। लखनऊ में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वत्रंतदेव सिंह, अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।
महोबा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सिद्धगोपाल साहू समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। सिद्धगोपाल साहू के पुत्र साकेत साहू व समर्थकों का विधानसभा चुनाव में मतदान पर बसपा से प्रत्याशी रहे अरिमर्दन सिंह के पुत्र हिमांचल सिंह व उनके समर्थकों व निर्दलीय प्रत्याशी से विवाद हो गया था। विवाद के दौरान घायल हुए निर्दलीय प्रत्याशी की मौत हो गई थी। इस मामले में पिछले माह सिद्धगोपाल साहू के पुत्र साकेत साहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से पूर्व मंत्री के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे थे।
महोबा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सिद्धगोपाल साहू का सपा से टिकट कट गया था। तब सिद्ध गोपाल साहू ने अपने भाई संजय साहू को बसपा के टिकट से चुनाव लड़ाया था। उस दौरान एक कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ने विवादित बयान दिया था। तब हिंदू संगठनों व भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। साथ ही शहर के एक होटल में एकत्रित होकर जुलूस निकालकर उनके प्रतिष्ठान का घेराव किया था। ऐसे में पूर्व मंत्री के भाजपा की सदस्यता लेने के बाद विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है।