दहेज उत्पीड़न व बलात्कार के मामले में मंगलवार को त्वरित निस्तारण अदालत (एफटीसी फस्ट) ने सास ससुर को तीन वर्ष की सजा व प्रत्येक को नौ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, बलात्कारी देवर को दस साल की सजा व 67 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
गांव निवासी युवती का विवाह गांव के छिद्दू उर्फ बौरा के पुत्र सैरुद्दीन से पांच जुलाई 2011 को हुआ था। शादी के बाद से सास सायरा, व ससुर छिद्दू उर्फ बौरा व देवर निजाम उर्फ बाबू उसे दहेज का ताना देकर प्रताड़ित करते थे। शादी के दो माह बाद पीड़िता का पति सऊदी चला गया था।
पति के गैर मौजूदगी में एक जुलाई 2013 को देवर निजाम उर्फ बाबू ने तमंचा लगाकर पीड़िता संग बलात्कार किया। पीड़िता ने न्यायालय के जरिए मुकदमा दर्ज कराया था।
एफटीसी फस्ट के न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने आरोपियों को दोषी पाते हुए सास सायरा व ससुर छिद्दू उर्फ बौरा को तीन साल की सजा व नौ-नौ हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया। वहीं बलात्कारी देवर को 10 साल की सजा व 67 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया। मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता आनंद सक्सेना ने की।