फोटो 19 एचएएमपी- 16- खाता खुलवाने का फार्म दिखाती बैंकसखी ऊषा। श्रोत स्वयं
हमीरपुर। बैंक सखी योजना ने अब गांवों की महिलाओं के जीवन में नई रोशनी भर दी है। योजना से जुड़कर यहां की 68 महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ साबित हो रही हैं।
जिले की 330 ग्राम पंचायतों में करीब 7,300 स्वयं सहायता समूहों का संचालन हो रहा है। इनमें करीब 73,000 महिलाएं जुड़ी हैं। कई बैंक सखियां गांव-गांव में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाकर ग्रामीणों की मदद कर रही हैं। सरकार की ओर से प्रत्येक बैंक सखी को 4,000 रुपये महीना मानदेय दिया जाता है। इसके साथ ही लेन-देन पर मिलने वाले कमीशन से उनकी आय और भी बढ़ जाती है। बैंक सखियां घर-घर जाकर जमा-निकासी, जनकल्याणकारी योजनाओं का सत्यापन, पेंशन, सब्सिडी आदि के भुगतान जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रहीं हैं।
खुद को मिला रोजगार, दूसरों की करती मदद
बैंक सखी का काम करने वालीं सुमेरपुर के पारा गांव निवासी ऊषा ने बताया कि जब से यह काम शुरू किया है, आर्थिक मजबूती मिली है। वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को बैंकिग से जुड़ी जानकारी देती हैं और उनकी हर संभव मदद करती हैं।
-
समूहों से जुड़कर महिलाएं बैंक सखी का काम कर रही हैं। जिले में 68 महिलाएं इस समय बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं। वह समूह से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग संबंधी जानकारियां देने के साथ उनकी समस्या का निस्तारण करवाती हैं। - प्रशांत मिश्रा, जिला मिशन प्रबंधक।