संवाद न्यूज एजेंसी
गोहांड/राठ (हमीरपुर)। करोड़ों खर्च के बाद भी अगर पुल की हालत नहीं सुधरती तो सवाल उठना लाजिमी है। राठ-उरई रोड पर बेतवा नदी पर चिकासी-मोहाना पुल की हालत कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। मार्च में 1.54 करोड़ रुपये से पुल की मरम्मत कराई गई थी लेकिन सिर्फ सात माह में चौथी बार पुल की स्लैब उखड़ने लगी है। कई जगह स्लैब क्षतिग्रस्त होने से सरिया बाहर निकल आई है। विभाग फिर से काम करा रहा है लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बेतवा नदी पर चिकासी और मोहाना के बीच बना पुल हमीरपुर और जालौन जनपद को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। वर्ष 1983 में बनकर तैयार हुए पुल से प्रतिदिन 25 साै वाहन गुजरते हैं। महोबा, हमीरपुर, जालौन और झांसी के साथ कानपुर, इटावा व दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह प्रमुख रास्ता है। क्षेत्र के करीब पांच लाख लोगों की आवाजाही इस पुल पर निर्भर बताई जाती है। ऐसे में पुल की स्लैब का बार-बार उखड़ना केवल मरम्मत कार्य पर सवाल नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
मरम्मत के बाद भी नहीं सुधरी हालत: पुल की जर्जर स्थिति को लेकर अमर उजाला ने दो अक्तूबर 2025 को बेतवा नदी पर बना पुल कर रहा घायल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद विभाग ने मरम्मत कराई। पांच फरवरी से 16 मार्च तक पुल पर आवागमन बंद रखकर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, एक्सपेंशन जॉइंट बदलने और सतह मजबूत करने का काम किया गया।
करीब 40 दिन तक आवागमन ठप रहने से करीब 50 गांवों की डेढ़ लाख आबादी प्रभावित हुई थी। 17 मार्च को पुल पर यातायात बहाल हुआ लेकिन मरम्मत के तीन माह के भीतर ही स्लैब उखड़ने लगी थी। उस समय सरिया बाहर निकलने पर दोबारा मरम्मत कराई गई। अब सात माह के भीतर चौथी बार स्लैब क्षतिग्रस्त होने से मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है।