हत्या के एक मुकदमे में न्यायालय में उपस्थित न होना राठ कोतवाल जगदेव प्रसाद यादव को महंगा पड़ गया। गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र अदालत के न्यायाधीश राधेश्याम यादव ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कोतवाल को निलंबित करने के लिए डीआईजी को पत्र लिखा है। वहीं, अदालत ने कोतवाल को गिरफ्तार कर अगली तारीख में साक्ष्य के लिए न्यायालय में पेश करने के भी आदेश दिए हैं।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता देव सिंह यादव ने बताया कि न्यायाधीश राधेश्याम यादव ने डीआईजी को लिखे पत्र में कहा है कि न्यायालय में 91/2012 राज्य बनाम कुंवर लाल आदि धारा 302 व 34 भादस थाना जरिया न्यायालय में साक्ष्य के लिए लंबित है।
इस वाद में साक्षी राठ कोतवाली के प्रभारी प्रभारी निरीक्षक जगदेव प्रसाद यादव हैं। जिन्हें मुकदमे में साक्ष्य देना है। मगर सम्मन जारी किए जाने के बावजूद वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। जिसके कारण उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं हो पा रहा है।
उक्त वाद को उच्च न्यायालय ने यथाशीघ्र निस्तारित करने के आदेश दिए हैं। बताया कि उक्त मुकदमे की मानीटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जा रही है। सम्मन की जानकारी होने के बावजूद जानबूझ कर साक्षी न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। जिसके चलते साक्षी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।
न्यायाधीश ने डीआईजी से कहा है कि साक्षी के विरुद्ध नियमानुसार निलंबन की खुद कार्रवाई करें अथवा एसपी को इसके लिए आदेशित करें। साथ ही आदेश में कहा है कि अगली पेशी की तारीख 23 अप्रैल को नियत है, जिसमें साक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करें।
गौरतलब हो कि इस तरह का एक आदेश इसी अदालत ने बीते दो अप्रैल को भी दिया था, जिसमें पनवाड़ी थाने में तैनात सिपाही भी साक्ष्य के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो रहा था। न्यायालय के सख्त तेवर देख पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है।