मौदहा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
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कंस वध मेले में शुक्रवार देर रात परंपरागत तरीके से कंस दरबार सजाया गया। लेकिन पूर्व के वर्षों की तरह कंस व उसके दरबारियों की घासफूस की प्रतिमाएं न बनाए जाने से दर्शकों को मायूसी हुई। गुड़ाही मंडी में कंस दरबार के लिए टेंट लगाया गया।
लेकिन कंस व उसके सेनापति के पुतले बकासुर, सूर्पणखा, हाथी तथा घोड़े नहीं सजाए गए। स्थानीय प्रसिद्ध लक्ष्मीनारायण मंदिर से उठने वाला डोला साधू संतो के साथ जुलूस में सम्मिलित नहीं हो सका। इससे लोगों को निराशा हाथ लगी। थाना चौराहा रामलीला मैदान में रामलीला का शानदार मंचन हुआ, जिसे दर्शक देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। वातवरण राम मय हो गया। जनक की भूमिका पिपरौंदा निवासी मातादीन त्रिपाठी ने निभाई, परशुराम का पाठ प्रदीप पांडेय फतेहपुर ने किया और राम की भूमिका में शैलेंद्र कानपुर रहे। वहीं लक्ष्मण की भूमिका में कानपुर के छुन्ना रहे। रामलीला की शुरुआत गुरु विश्वामित्र के भगवान राम लक्ष्मण को संध्या उपदेश के साथ हुई।
आयोजक राजेंद्र विश्वकर्मा, मुन्ना मैनेजर, पप्पू सोनी रहे। सुरक्षा व्यवस्था चुस्त रखने पर सीओ उमरदराज खां सहित अन्य पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया गया। वहीं झांसी के आए कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। यहां कई बार पुलिस को लोगो को शांत करना पड़ा। कांशीराम कालोनी व ओरी तालाब में 51 घंटे का भजन कार्यक्रम चला।