जिला कारागार में कुछ बंदी मनमानी पर उतारू है, गुटबाजी हावी है। मनमानी
रोकने पर बंदी किसी हद तक जा सकते है। कारागार प्रशासन ने हमेशा झगड़ा फसाद
करने वाले बंदियों की एक रिपोर्ट तैयार की। ताकि इन्हें दूसरे जनपदों की
कारागार में भेजने की पैरवी की जा सके। फिलहाल जिला कारागार के अंदर बीते
शनिवार को मोबाइल सहित अन्य अवैध वस्तुएं मिलने के बाद से हड़कंप है।
जिला
कारागार में जनपद बांदा के थाना मटौंध के गोयरा मुगली गांव निवासी लाला
उर्फ सफात बंदी है। शनिवार को इस बंदी ने मोबाइल के जरिए मीडिया और
जिलाधिकारी को खुद की हत्या करने की सूचना दी। जिस पर जिलाधिकारी संध्या
तिवारी पूरे प्रशासनिक अमले के साथ कारागार पहुंची।
वहां उन्होंने सफात,
वसीम व छिद्दन के कब्जे से तीन मोबाइल बरामद किए, साथ ही सफात के पास से एक
कैंची व उस्तरा बरामद हुआ। इस मामले में जिलाधिकारी ने शासन को कारागार के
खिलाफ रिपोर्ट भेजी है। वहीं कारागार प्रशासन की मानें तो बंदी सफात वर्ष
2013 में 14 फरवरी को जिला कारागार में आया था।
तबसे अब तक कई बार पुलिस और
कारागार पुलिस से झगड़ा फसाद कर चुका है। 26 जून 2013 को बंदी लाला उर्फ
सफात स्थानीय अदालत में पुलिस अभिरक्षा में पेश किया गया। पुलिस स्कार्ट के
प्रभारी बाबूराम के समक्ष बंदियों की तलाशी ली गई तो मोबाइल बरामद हुआ।
मोबाइल चेक करने पाया कि मोबाइल में सिम नहीं है।
इस पर बंदी ने अपने शरीर
पर चोट पहुंचाकर शिकायत करके जेल कार्मिकों को फंसाने की धमकी दी। फिर 24
मई 2013 को छतरपुर की अदालत से लाकर कारागार में दाखिल होने पर तलाशी लेने
में विरोध करने लगा। 23 मई को सदर लाकप में मोबाइल पर बात करते पुलिस
स्कार्ट ने पकड़ा।
28 अप्रैल को महोबा पेशी पर जाते पुलिस कर्मियों से दबाव
बनाकर अपने घर घूमने गया था। विरोधियों की शिकायत पर तीन पुलिस कर्मी
निलंबित हुए। कारागार की रिपोर्ट आख्या में इस बंदी ने बीते 28 मई 2013 को
खन्ना के पास खाने पीने की जिद कर उप निरीक्षक हरेकृष्णलाल मिश्र के साथ
मारपीट की।
बीते माह की 31 को महोबा अदालत से लौटते विचाराधीन बंदी वसीम,
लाला उर्फ सफात ने कारागार बंदियों से अभद्रता की और देखलेने की धमकी दी।
इसके साथ अन्य बंदी छिद्दन ने अपने बैरक के बाहर तैनात बंदी रक्षक को
धमकाया।
बीते 5 फरवरी को सफात ने शाम को बंदियों क ो खाना लेने से मना किया
तथा बंदियों में गुटबाजी करके उन्हें भड़काने के साथ नाजायज मांगो को
मनवाने का दबाव बनाया। बीते शनिवार को कारागार में तलाशी के दौरान स्टाफ व
नंबरदारों को घेरकर मारने पीटने तथा बंधक बनाने की नियत से अन्य अराजक
बंदियों के साथ मिलकर हमला किया।
जिला कारागार के अधीक्षक राजेंद्र कुमार
सोनकर ने इस मामले में कहा कि बंदी सफात सहित तीन बंदियों के जिला कारागार
में निरुद्ध रहने से प्रशासनिक व्यवस्था पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में
कभी भी विषम स्थित उत्पन्न हो सकती है। इन बंदियों दूसरे कारागारों में
स्थानांतरित करने के लिए अधिकारियों को लिखेंगे।