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Hamirpur News: प्रीमियम वसूला 4.60 करोड़, मुआवजा 2.28 लाख

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हमीरपुर। किसानों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जिम्मेदारों की लापरवाही का शिकार है।
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प्रचार-प्रसार के अभाव में किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। खरीफ सीजन में किसानों की बीमा कंपनी ने प्रीमियम काटा 4.60 करोड़ और मुआवजा 2.28 लाख देने का दावा किया है। सरकार की नजरों में खुद को बेहतर साबित करने के लिए हर साल बीमित किसानों की संख्या तो बढ़ाई जा रही है। लेकिन लाभ दिलाने के लिए योजना के प्रति जागरूक नहीं किया जा रहा है।
यही कारण है कि बीमित किसानों को दैवी आपदा से हुई फसलों की क्षति के लिए 72 घंटे के अंदर कृषि विभाग द्वारा जारी टोल फ्री नंबर पर शिकायत करने तक की जानकारी नहीं है। जिले में काम कर रही एग्रीकल्चर इंश्योरेंस फसल बीमा कंपनी भी इसे गंभीरता से नहीं लेती है। न ही योजना के बारे में किसानों को ठीक से जानकारी दी जाती है, जिससे किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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जनपद में खरीफ सीजन की तुलना में 30 हजार से अधिक किसानों ने रबी फसलों का बीमा कराया है। रबी सीजन में कुल एक लाख तीन हजार 854 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है। 1,02,095 ऋणी व 1,759 गैर ऋणी किसान शामिल हैं। जिम्मेदार ऋणी किसानों को बीमा के बारे में बिना जागरूक किए ही उनका बैंकों के माध्यम से बीमा कर दिया जाता है। गैर ऋणी किसानों की संख्या नगण्य है। क्योंकि रबी सीजन में किसान नुकसान की कम आशा रखते हैं। खरीफ सीजन में 20,321 गैर ऋणी किसानों ने बीमा कराया था।
चालू वित्तीय रबी सीजन में 2,68,121 हेक्टेयर में गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों व अलसी आदि फसलें किसानों ने बो रखी हैं। इनमें 1.29 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 1,15,541 हेक्टेयर में दलहनी व 23,538 हेक्टेयर में तिलहनी फसलें बोई गईं हैं। फरवरी माह से अब तक तीन बार बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि हो चुकी है। जिले की 50 फीसदी सेे अधिक फसलें चौपट हो गईं हैंं। क्षतिपूर्ति के लिए किसान अधिकारियों की चौखट के चक्कर लगा रहे हैं।
करोड़ों का प्रीमियम वसूल कर बीमा कंपनी मलाई खा रही है। जबकि किसान अपनी बर्बादी पर दहाड़े मारकर रो रहा है। किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। खरीफ सीजन में कुल 71,744 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया था। 51,723 ऋणी व 20,321 गैर ऋणी किसान शामिल थे। इनमें 3,551 किसानों ने बीमा कंपनी को फसल नुकसान का दावा किया था। मात्र 544 किसानों को 2.28 लाख की क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी ने तत्काल राहत के तौर पर दिए जाने का दावा कर रही है। जो ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है। क्रॉप कटिंग के आधार पर कितने किसानों को कब राहत मिलेगी। अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। हालांकि कंपनी के जिम्मेदार इसी माह क्षतिपूर्ति दिए जाने का दम भर रहे हैं।
सदर तहसील के कंडौर गांव निवासी किसान संतोष सिंह डीएम से फसल नुकसान का मुआवजा दिलाए जाने के लिए मुख्यालय आए थे। पूछने पर बताया कि वह केसीसी धारक किसान हैं। दो बार हुई ओलावृष्टि में सारी फसलें चौपट हो गईं हैं। उन्हें टोल फ्री नंबर के बारे में जानकारी ही नहीं हैै।
पारा निवासी किसान प्रमोद कहते हैं कि 1.33 लाख का केसीसी बना है। बैंक ने बीमा भी काटा है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि दैवी आपदा आने पर फसल नुकसान का 72 घंटे के अंदर दावा भी करना है।
कंडौर निवासी किसान बाबा सिंह ने बताया कि वर्ष 2021-22 में दो बार फसलों का बीमा कराया। एजेंट से नुकसान को कहा तो वह बोला लेखपाल से लिखा कर दो। इसी चक्कर में दोनों बार क्षतिपूर्ति नहीं मिली। कहा कि तबसे बीमा कराना बंद कर दिया।
फसल क्षतिपूर्ति के लिए आए रघवा निवासी किसान रामसनेही ने बताया कि दो बार हुई ओलावृष्टि में 80 फीसदी फसलें चौपट हो गईं हैं। बैंक से केसीसी भी बना है। लेकिन दावा करने की जानकारी उसे नहीं है। न ही किसी ने उसे बताया।
जिले में रबी सीजन वर्ष 2022-23 में कुल 58,930 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया था। 493.34 लाख रुपये किसानों ने प्रीमियम के रूप में जमा किया था। इनमें ऋणी कृषक 57,888 व गैर ऋणी 1,042 किसान शामिल थे। इनमें 4,508 किसानों ने दैवी आपदा से खराब हुई फसलों का दावा संबंधित बीमा कंपनी यूनीवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस में किया था। इसमें बीमा कंपनी 3,991 किसानों को 256.11 लाख रुपये की धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में जारी कर 517 किसानों के दावे जांच में निरस्त किए थे। जबकि संबंधित बीमा कंपनी प्रीमियम के 237.23 लाख की धनराशि हजम कर गई। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा पटनाहा ने संबंधित बीमा कंपनी सहित डीएम व शासन को जांच कर किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की थी। जिसे जिम्मेदारों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
एग्रीकल्चर इंश्योरेंस फसल बीमा कंपनी के जिला कोआर्डिनेटर अजीत शर्मा ने बताया कि समाचार पत्रों व गांव-गांव जाकर योजना के बारे में जानकारी दी जा रही है। कहा कि चालू रबी सीजन में 4.78 करोड़ किसानों का प्रीमियम जमा हुआ है। इतना ही राज्य व केंद्र सरकार का होता है। कहा कि खरीफ सीजन में 4.60 करोड़ प्रीमियम कटा था। 2.28 लाख की पहली किस्त दी जा चुकी है। मार्च माह में ही फाइनल क्षतिपूर्ति का मुआवजा इसी माह किसानों को मिल जाएगा।
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भरुआ सुमेरपुर। ओलावृष्टि के 15 दिन गुजरने के बाद किसानों को सरकारी सहायता का एक ढेला अभी तक नसीब नहीं हुआ। ब्लॉक के 40 गांव ओलावृष्टि से प्रभावित हैं। इन गांवों में 20 फरवरी से लेकर पांच मार्च के बीच तीन बार ओलावृष्टि हुई है। कृषि विभाग निरीक्षण के दौरान कह चुका है कि किसान बुरी तरह से तबाह हुआ है। मुख्यमंत्री के आदेश हैं कि ओला प्रभावित किसानों को 24 घंटे में मदद मुहैया कराई जाए। लेकिन यह आदेश यहां नदारद है। ओलावृष्टि के 15 दिन गुजर जाने के बाद किसानों को एक ढेला नसीब नहीं हुआ है। ओला प्रभावित बांक, बिलहडी, बांकी, नदेहरा, स्वासा खुर्द, स्वासा बुजुर्ग, कुम्हऊपुर, मोराकांदर, सहुरापुर, उजनेडी, कलौलीजार, पौथिया, दरियापुर, कुंडौरा, सौंखर, देवगांव, पंधरी, पारा रैपुरा, बिरखेरा, मौहर, अतरैया, टेढा,पचखुरा बुजुर्ग, बरुआ, भौंरा, सुरौली बुजुर्ग आदि के ग्राम प्रधानों ने बताया कि अभी तक किसी तरह की सहायता नहीं मिली है। सर्वे के बाद लेखपाल किसानों से खतौनी आधार कार्ड आदि मांग रहे हैं। इसके बाद ही सहायता मिलने की उम्मीद है।
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