मौदहा (हमीरपुर)। बुंदेलखंड का सूखा और गर्मी पालतू पशुओं पर भी कहर बरपाए हैं। गर्मी में फैलने वाले पीपीआर और सुर्रा रोगों की चपेट में आकर क्षेत्र के माचा गांव की 40 से ज्यादा बकरियां मर गईं। सैकड़ों बकरियां इन रोगों की चपेट में हैं। माचा गांव के फारूक चौधरी ने बताया कि उनके पास 16 बकरियां थीं। चार-पांच दिन से बकरियों ने पोंकना शुरू कर दिया। इसी के साथ नाक बहने, गला सूखने और मुंह में छाले पड़ने से एक-एक कर मंगलवार तक सात बकरियां मर गईं। तीन बीमार बकरियों को बुधवार को पशु अस्पताल ले गया। फारूक ने बताया कि सूखे से उसके खेत में कुछ नहीं हुआ। पीने का साफ पानी और चारा न मिलने से जंगलों में इधर-उधर मुंह मारने वाले पशु बीमार होकर मर रहे हैं। वह बकरियों के ही सहारे वह परिवार पाल रहा है। आधी बकरियां बीमारी से मर गईं। ऐसे में जीविका पर संकट आ गया है।
इसी गांव के रजवा के पास एक दर्जन बकरियां हैं। इन रोगों की चपेट में आकर सात बकरियां मर गईं। गांव की लतीफुन की तीन बकरियां, रफीक की पांच, बकरियां, शाहिद अली की दो, मोहम्मद शब्बीर की तीन और जाकिर अली की दो बकरियां भी इन्हीं रोगों से मर गईं। इसके अलावा गांव के अन्य पशुपालकों की दस बकरियां भी पीपीआर और सुर्रा रोग की चपेट में आकर मर गईं हैं।
इस बाबत उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. आरके गुप्ता ने बताया कि सूखे के अलावा इन दिनों तापमान भी 47-48 डिग्री पहुंच रहा है। इसका असर बेल की पत्तियों और चारे पर पड़ रहा है। इसे खाकर बकरियां पीपीआर रोग की चपेट में आ रही हैं। पीपीआर रोग में नाक बहने के साथ पेट में कीड़े और मुंह में छाले पड़ जाते हैं। साथ ही बकरियां पोंकने लगती हैं। बीमारी से बचाव के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। पशु अस्पताल में पोंकना रोग और पेट के कीड़ों की दवा उपलब्ध है। पशु पालक इसका फायदा उठा सकते हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी जेएन पांडेय ने बताया कि गर्मी ज्यादा बढ़ने से हीट स्ट्रोक से बकरियां मर रही हैं। मौदहा के माचा गांव में बकरियों की बीमारी से मौत की सूचना मिली है। पशु चिकित्सकों की टीम माचा गांव भेजी जा रही है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के साइंटिस्ट (डेयरी टेक्नालाजी) रामजी गुप्ता ने भी इस बीमारी की पुष्टि की है।