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बुआई का समय निकट पर पलेवा को पानी नहीं

Sun, 16 Oct 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
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छानी पंप कैनाल की सूखी पड़ी नहर। - फोटो : अमर उजाला
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 पहले सूखा फिर अतिवृष्टि। अब जब बुआई का समय आया तो नलकूपों के ट्रांसफार्मर व मोटरें खराब हैं। साथ ही लिफ्ट कैनालें भी जवाब दे रही हैं। छानी गांव के निकट केन नदी पर स्थापित लघु डाल नहर विभाग की लिफ्ट कैनाल करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाल है।
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छानी गांव स्थित पंप कैनाल की स्थिति बेहद खराब है। कैनाल से क्षेत्र के एक दर्जन बीहड़ी गांवों में नहरों का जाल बिछाया गया है। नदी से निकली कैनाल के बार्ज पर सात मोटर पंप लगे हैं। लेकिन काम सिर्फ दो ही कर रहे हैं। नदी के ऊपर नहर में पानी फेंकने के लिए छह पंप लगे हुए हैं लेकिन दो पंप ही काम कर रहे हैं। इस कैनाल को पूरी क्षमता से वर्ष 2012-13 तक ही किसानों को पानी मिल सका।


इसके बाद क्षेत्र में पड़े ओला, सूखा व अतिवृष्टि से पीड़ित किसानों को इसका भरपूर पानी नहीं मिल सका। इस पंप कैनाल के टेल में पड़ने वाले गांव छोटा लेवा, बड़ा लेवा, सिसोलर का मइयादीन डेरा के आसपास कहीं पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। नहर का पानी सिर्फ छानी व भटुरी तक ही सीमित है। भैंसमरी गांव भी इससे वंचित है। सिसोलर प्रधान विजय शंकर प्रजापति ने बताया कि इस कैनाल को अभी तक चलाया नहीं जा सका है। सिर्फ दो मोटरें ही चल पा रही हैं। पानी न मिलने से किसान पलेवा को लेकर परेशान हैं।
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केन नदी में आई बाढ़ आने से छानी पंप कैनाल का एक बार्ज डूब गया था। इसके डू बे बार्ज को सीधा कराकर मोटर पंप विभाग के अभियंताओं ने निकलवा लिए हैं। लेकिन अभी तक पानी फेंकने वाले पंपों से जोड़ा तक नहीं है। जहां पंप कैनाल में पंपाें की स्थिति खराब है, वहीं नहर भी जगह-जगह टूटने के बाद भी मरम्मत का कार्य विभाग ने नहीं शुरू कराया है। आने वाले 15 दिनों में पलेवा के साथ ही प्रथम सिंचाई का कार्य शुरू हो जाएगा। लेकिन इस नहर व पंप कैनाल की दुर्दशा सही नहीं हुई तो किसानों की बुआई नहीं हो सकेगी। बीते वर्षो में सूखा, अतिवृष्टि से जिन किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। उनको बुआई करना मुश्किल हो जाएगा।



इस कैनाल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए स्पेशल सेंटर पैकेज फॉर डेवलपमेंट बुंदेलखंड विशेष पैकेज से वर्ष 1910-11 में 21.44 करोड़ रुपये दिए गए थे। ताकि जिले की सबसे पिछड़ी मौदहा तहसील के सिसोलर जैसे   बीहड़ी इलाके  के किसानों को लाभ मिल सके। लेकिन भारी भरकम रकम पाने के बाद भी अधिकारी कैनाल को पूरी क्षमता से संचालित नहीं कर सके हैं।
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