क्रांतिकारी पंडित परमानंद के 123वें जन्मोत्सव पर नानाजी कुटुम्बकम ने रामलीला मैदान में पंडित परमानंद के जीवन से संबंधित प्रदर्शनी का आयोजन किया। प्रदर्शनी में लगे चित्रों को लोग निहारते रह गए।
शनिवार को नानाजी कुटुम्बकम ने क्रांतिकारी पंडित परमानंद के जीवन एवं उनके कार्यों से संबंधित दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन उपजिलाधिकारी राजेश कुमार सिंह ने फीता काटकर किया। एसडीएम ने क्रांतिकारी पंडित परमानंद के चित्र के सामने दीप प्रज्जवलित कर पुष्प अर्पित किए। प्रदर्शनी में पंडित परमानंद ने अंडमान निकोबार में 23 साल काले पानी की सजा काटना, अंग्रेजों की प्रताड़ना, पंडित जी द्वारा जेलर की पिटाई, सुभाषचंद्र बोस से मिली पंडित जी उपाधि, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा पुनर्वास की जिम्मेदारी आदि विभिन्न गतिविधियां एवं उनकी अंतिम यात्रा से संबंधित विभिन्न चित्रों की प्रदर्शनी लोगों के आक र्षण का केंद्र रही। बता दें कि परमानंद का जन्म 6 जून 1892 को राठ तहसील के सिकरौधा गांव में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने बाद देश की आजादी के लिए आंदोलन में कूद गए। उदघाटन के अवसर पर आलू अनुसंधान केंद्र शिमला के पूर्व निदेशक डा.बी.बी नगाइच, फूलसिंह सैना, शिवप्रकाश गुप्ता दाऊ, रविंद्र शर्मा, केके गुप्ता बंटी, राजीव कुमार आर्य, पंकज शर्मा, राजेंद्र द्विवेदी, भरत अनुरागी, संजय त्रिपाठी, प्रेमचंद्र, नितिन गुप्ता आदि लोग रहे।