हमीरपुर। जिला अस्पताल में सरकार की शव वाहन सुविधा योजना पूरी तरह से दम तोड़ती नजर आ रही है। शनिवार को कुरारा क्षेत्र के एक युवक के परिजन को शव ले जाने के लिए ई-रिक्शा करना पड़ा। 800 रुपये भाड़ा दे 16 किलोमीटर दूर शव को लेकर जाना पड़ा, लेकिन सरकारी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका।
जिले की करीब 12 लाख से अधिक की आबादी है। दो तहसीलों सदर व राठ में पोस्टमार्टम हाउस संचालित हैं। इन सबके बीच मात्र दो शववाहन स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध हैं। एक जिला अस्पताल में व दूसरा राठ सीएचसी में 24 घंटे तैनात रहता है। दोनों पोस्टमार्टम हाउसों में हर माह 70-80 पीएम होते हैं। इनमें पांच-छह लावारिस शव शामिल रहते हैं।
निर्धन, अनपढ़ व असहाय आम लोगों को ये शव वाहन लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इन समस्याओं से बचने के लिए ज्यादातर लोग अपने निजी वाहनों या भाड़े के वाहनों पर शव ले जाने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसा ही मामला बीते शनिवार को देखने को मिला, जहां परिजन युवक के शव को ई-रिक्शा में बांधकर ले जाते सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
ये है पूरा मामला
बता दें कि शनिवार को कुरारा पुलिस को क्षेत्र के खिरवा मोड़ पुलिया के पास एक युवक मृत अवस्था में मिला था। पुलिस ने शव की शिनाख्त कर उसका पोस्टमार्टम कराकर उसके रिश्तेदार को सौंप दिया था। रिश्तेदार दिलदार मंसूरी ने बताया कि शववाहन के लिए काफी गिड़-गिड़ाता रहा, लेकिन शव वाहन उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस, ऑटो चार पहिया निजी वाहनों से संपर्क किया, लेकिन वह 2500-3000 रुपये मांग रहे थे। इतने पैसे न होने के कारण उसने 800 रुपये भाड़े का एक रिक्शा कर उसमें पटरा लगाकर शव को उसमें बांधकर 16 किलोमीटर दूर कुरारा कस्बा तक ले जाना पड़ा। कुरारा थाना प्रभारी रामआसरे सरोज का कहना है कि शव वाहन की व्यवस्था जिला अस्पताल प्रशासन की है। उनके पास शव वाहन की सुविधा नहीं है।
कैसे मिलेगा शववाहन, नहीं जानकारी
कुरारा क्षेत्र के बदनपुर निवासी पच्ची ने बताया कि शनिवार शाम उसकी सास फूलवती शौच के लिए जा रही थी, तभी एक कार सवार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम करा रहे हैं। ई-रिक्शा करके शव को ले जाएंगे। शव वाहन कैसे मिलता है, उन्हें जानकारी नहीं है।
दो साल से शव वाहन में नहीं चालक की तैनाती
राठ सीएचसी में शव वाहन के लिए चालक नहीं है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया दो वर्ष पहले चालक सेवानिवृत्त हो गया था। उच्चाधिकारियों के आदेश पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व अर्दली को शव वाहन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक माह में 25 पोस्टमार्टम हुए हैं। इनमें से 12 शवों को शव वाहन से भेजा गया है, जबकि अन्य शवों को उनके परिजन अपने निजी वाहनों से ले जाते हैं। वहीं, सीएचसी में मौत होने पर आठ शवों को उनके घर भेजा गया है। शव वाहन 24 घंटे अस्पताल में मौजूद रहता है। आवश्यकता पड़ने पर इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर को अवगत कराने पर उपलब्ध करा दिया जाता है।
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जिले में दो शव वाहन हैं। एक जिला अस्पताल व दूसरा राठ सीएचसी में 24 घंटे तैनात रहता है। शव वाहन जिले से बाहर ले जाने के लिए पहले सीएमएस को प्रार्थना पत्र देना पड़ता है। इसके बाद वह अनुमति देते हैं। जिले के अंदर शव वाहन ले जाने के लिए उनकी अनुमति की जरूरत नहीं है। सीएमएस स्तर से ही वाहन उपलब्ध हो जाता है। मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. गीतम सिंह, सीएमओ।