सुमेरपुर विकास खंड क्षेत्र के छानीखुर्द व छानीबुजुर्ग गांव अभी भी टापू बने हैं। मंगलवार रात जोरदार बारिश का पानी दोनों गांवों में भरा है। वहीं, करीब 250 मकान जमींदोज हो गए हैं। बेघर लोगों ने ऊंचाई वाले क्षेत्र व गांव के प्राथमिक विद्यालय में शरण ले रखी है। प्रशासन ने नाव की व्यवस्था कराई है। उधर, उमरी गांव में भी अब तक 500 घर गिर चुके हैं।
छानीखुर्द व छानीबुजुर्ग गांव में गिर रहे मकानों का सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने नाव की व्यवस्था कराई है। जिसमें लोग अपना सामान ले जा रहे हैं। दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधान पीड़ितों को भोजन मुहैया करा रहे हैं। छानी बुजुर्ग के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बाबू यादव ने पूड़ी, सब्जी वितरित कराई।
वहीं, छानी खुर्द गांव के प्रधान प्रतिनिधि हरगोविंद प्रजापति ने संकट मोचन मंदिर में खाने के पैकेट बनवाकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शरण लिए बेघरों को वितरित कराए। गांव स्थित सहकारी समिति के गोदाम में रखी 72 बोरी यूरिया खाद पानी में भीग गई है। पौथिया प्रतिनिधि के अनुसार, चार दिन से लगातार हो रही बारिश से क्षेत्र भर में तबाही मची है।
गांव में शुक्रवार की सुबह कामता निषाद, मैका निषाद, रामऔतार, मइयादीन, रमनी, रवींद्र चौधरी, दीनदयाल, रामेश्वर, बरदानी आदि के एक दर्जन से अधिक मकान धराशायी हो गए। बिवांर प्रतिनिधि के अनुसार, बेतहाशा बारिश से उमरी गांव में तो स्थिति और भी खराब है। अब तक उमरी में लगभग 500 घर गिर चुके हैं।
प्रधान प्रतिनिधि अनिल पालीवाल ने बताया कि लगभग 200 से भी अधिक लोगों के घर पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। उन्हें गांव के ही शाश्वत शांति इंटर कालेज में परिवार सहित रखा गया है और ग्राम पंचायत की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई है। गुरुवार के दिन मौसम खुलने से कुछ राहत रही। लेकिन शाम छह बजे एक बार फि र मूसलाधार बारिश कहर बन कर टूट पड़ी।