हमीरपुर। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने मुद्रा लोन योजना शुरू की थी। इसके तहत 10 हजार से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन लिया जा सकता है। जिले में यह योजना कारगर होती नहीं दिख रही है। घरेलू समस्याओं और लोन लेने के बाद कार्य बंद कर देने से करीब एक तिहाई लोग किस्त नहीं जमा कर पा रहे हैं। इस वजह से 8,741 लाभार्थियों को डिफाल्टर घोषित करके 56 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज एनपीए में डाल दिया गया है।
प्रधानमंत्री मुद्रा ऋण योजना में तीन प्रकार की श्रेणियों में उपलब्ध है। शिशु योजना में 10 से 50 हजार रुपये तक कर्ज दिया जाता है। किशोर योजना में 50 हजार से पांच लाख रुपये तक लोन मिलता है। जबकि तरुण योजना में पांच से 10 लाख रुपये तक कर्ज दिया जाता है। जिले में करीब 19 बैंकों ने 26,572 लोगों को 226 करोड़ रुपये से अधिक का मुद्रा ऋण वितरित किया है। इनमें से 8,741 लाभार्थियों का 56 करोड़ से अधिक का कर्ज नान परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) हो गया है। सबसे अधिक किशोर लाभार्थी बकाएदार बने हैं।
जनपद में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों ने वर्ष 2024 में 26,572 लोगों को 226.44 करोड़ का मुद्रा लोन दिया है। इनमें 13,126 शिशुओं को 23.72 करोड़, 12,559 किशोरों को 153.17 करोड़ व 887 युवाओं को 49.55 करोड़ का मुद्रा लोन दिया गया है। इनमें 4,057 शिशुओं का 5.93 करोड़, 4632 किशोरों का 46.22 करोड़ व 72 युवाओं का 3.84 करोड़ का एनपीए हो गया है। अब इसकी रिकवरी के लिए बैंके हाथ पैर मार रहे हैं। (संवाद)
ये होते हैं पात्र
मुद्रा योजना में पेशेवर सीए, आईसीडब्ल्यूए, सीएस, आर्किटेक्ट, चिकित्सा पेशेवर, व्यापार एवं सेवा क्षेत्र में शामिल सभी सूक्ष्म उद्यमी योजना के पात्र होते हैं। किसी बैंक शाखा से या उद्यमी मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करके लोन लिया जा सकता है। वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि दस्तावेज देने पड़ते हैं।
एनपीए होने के पांच प्रमुख कारण
1- 10 से 11 फीसदी की ब्याज दर
2- हर माह भरनी पड़ती है किस्त
3- तीन किस्त न जमा करने पर हो जाता है एनपीए
4- 50 फीसदी लाभार्थी ऋण लेने के बाद व्यवसाय कर देते हैं ठप।
5- लाभार्थी पैसा लेने के बाद नहीं भरना चाहता ऋण।
6- बैंकों द्वारा ग्राहकों को सही जानकारी न देना।
केस- 1
बैंक वाले नहीं देते सही जानकारी
शहर निवासी शिवम गुप्ता ने वर्ष 2021 में 1.80 लाख रुपये का मुद्रा लोन लिया था। इनका खाता एनपीए हो गया है। बताते हैं कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है। फोन कर बैंक वाले परेशान करते हैं। हर माह एक हजार रुपया देने का मेरे पास समय नहीं है। बैंक जाने पर दुनिया भर के नियम बताते हैं। तीन साल के बीमा को बढ़ाकर पांच साल कर दिया है।
केस- 2
बेटे की बीमारी के चलते नहीं भर पाया किस्त
शहर के सुभाष बाजार निवासी राजनारायण ओमर ने जनरल स्टोर के लिए एक लाख का मुद्रा लोन वर्ष 21-22 में लिया था। किस्त नहीं जमा कर पाने की वजह से यह एनपीए हो गया है। वह कहते हैं कि बेटे के लिवर का इलाज चल रहा है। दो साल से उसी में परेशान हैं। जल्द ही ऋण चुकता करेंगे। इनका कहना है कि इसमें ब्याज दर बहुत अधिक है इससे परेशानी होती है।
कइयों ने लोन लेने के बाद नहीं किया कार्य
8500 से अधिक लाभार्थियों का करीब 56 करोड़ रुपये का कर्ज एनपीए हो गया है। ग्राहक पैसा लेने के बाद देना नहीं चाहता है। बहुत सारे लोग कार्य नहीं करते। आधे से अधिक लोगों ने लोन लेने के बाद कार्य ठप कर दिया। एफडी के मुताबिक ब्याज दर घटती-बढ़ती रहती है। सभी बैंकों का अलग-अलग नियम है। मुद्रा लोन में 10 से 11 फीसदी तक की ब्याज लगती है। बराबर रिकवरी की जा रही है। आरसी की भी कार्रवाई की जाएगी।
- संगमलाल मिश्रा, एलडीएम।