हमीरपुर। रबी अभियान में ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्रेरित कर फसल बीमा कराने के प्रयास तेज हैं। जिलाधिकारी डा. चंद्र भूषण ने कर्मचारियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रचारकरने को कहा है।
जिले में कुल दो लाख 22 हजार 50 किसान हैं। इन किसानों में खरीफ अभियान पर 43 हजार 749 ने फसल बीमा कराया था। इन्हीं किसानों में 2210 ने व्यक्तिगत बीमा कराया था। सोम्यो इंश्योरेंश कंपनी ने 4158 दावों का निस्तारण किया है। जिसके तहत 186.28 लाख की धनराशि स्वीकृति कर किसानों के खातों में भेजी है। उप कृषि निदेशक डा. सरस कुमार तिवारी ने बताया कि रबी अभियान ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्रेरित कर फसल बीमा के प्रयास चल रहे हैं। किसान आधार कार्ड, बचत खाता पासबुक की छाया प्रति, खतौनी की नकल व मोबाइल नंबर एवं स्व. घोषित प्रमाण पत्र के साथ जन सुविधा केंद्र तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल पीएमएफबीवाई डाट गांव इन पर फसल बीमा करा सकते हैं।
शहर के रमेड़ी मोहल्ला निवासी गिरीश शंकर शुक्ला ने कहा खरीफ अभियान में 40 बीघेे जमीन पर अरहर की फसल बोई थी। फसल खराब होने पर क्लेम के लिए दावा भेजा। कहा कि बीमा कंपनी ने अभी 50 फीसदी क्लेम में 58743 रुपये भेजा है। अधिकारी इस पर आगे बकाया धनराशि भेजने की बात कह रहे हैं।
इस्लामपुर निवासी किसान मुन्ना महाराज ने कहा उन्होंने 22 बीघे में उड़द की फसल बोने पर प्रीमियम के तहत 4500 रुपये जमा किए थे। कहा क्लेम के रूप में एक लाख 10 हजार 535 रुपये क्लेम मिला है। कहा फसल बीमा कराने पर लाभ मिला है। रबी फसल का भी बीमा कराया है।
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किन फसलों पर कितना जमा होगा प्रीमियम
फसल- बीमित रकम (प्रति हे.) - प्रीमियम रुपये
जौ - 42124 - 632
गेहूं - 58193 - 837
चना - 41798 - 627
मटर - 62291 - 634
मसूर - 37478 - 562
सरसों - 40613 - 609
अलसी - 25492 - 382
डीएपी संकट से सरसों, चना, मसूर का बढ़ा रकबा
गेहूं बुवाई में लगने वाली खाद को देखते किसान पीछे हटे
संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआ सुमेरपुर। बुवाई के दौरान डीएपी खाद का संकट रहा। ऐसे में किसानों ने गेहूं का रकबा सीमित कर दिया है। क्योंकि दलहनी एवं तिलहनी फसलों में गेहूं की अपेक्षा बहुत ही कम मात्रा में डीएपी की जरूरत पड़ती है।
क्षेत्र में कुल 52126 हेक्टेयर भूमि है। जिसमें 478 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। कृषि योग्य रकबा 51648 हेक्टेयर है। पिछले वर्ष ब्लॉक क्षेत्र में गेहूं का रकबा 10330 हेक्टेयर था। इस वर्ष यह आधा रह गया है। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार इस वर्ष गेहूं का रकबा 5165 हेक्टेयर में सिमट गया है। पिछले वर्ष तिलहन का रकबा 5164 हेक्टेयर था। जो इस वर्ष बढ़कर 10329 हेक्टेयर हो गया है। दलहन का क्षेत्रफल 36153 हेक्टेयर पिछले वर्ष के आस पास ही है। पिछले वर्ष चना, मसूर का रकबा बहुत कम था। मटर का रकबा ज्यादा था। इस वर्ष किसानों ने मटर का रकबा कम कर चना, मसूर पर ज्यादा दांव लगाया है। क्योंकि इन सभी फसलों में बुवाई के दौरान डीएपी खाद की बहुत कम जरूरत पड़ती है। कृषि विभाग के तकनीकी सहायक अजित शुक्ला ने कहा गेहूं उत्पादन में लागत अधिक होने से रकबा बढ़ाने से मोहभंग हुआ है।