हमीरपुर। शहर के रमेड़ी मोहल्ला स्थिति एक गेस्ट हाउस में मंगलवार शाम बुंदेलखंड अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था सुमेरपुर के तत्वावधान में स्मृति समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचना में पढ़ा कि ओ मयंक तेरे प्रकाश की ही तो एक किरण हूं मैं, पीछे छूट गया हूं पर तेरा शेष चरण हूं मैं।
प्रख्यात कवि व गीतकार गणेश प्रसाद खरे की स्मृति में यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमपाल द्विवेदी ने वंदना से की। गीतकार नाथूराम पथिक ने पढ़ा कि ओ मयंक तेरे प्रकाश की ही तो एक किरण हूं मैं, पीछे छूट गया हूं पर तेरा शेष चरण हूं मैं। नारायण तिवारी ने भाव उपवन से गये ही नहीं, वो चले तो गये तन से संसार से, किंतु मन से तो अपने गये ही नहीं। संस्था के उपाध्यक्ष मो. सलीम ने पढ़ा हिन्दू भी चाहिए, मुसलमान भी चाहिए, जो मुल्क सलामत रखे वो इंसान चाहिए।
रणविजय चक्रवर्ती ने पढ़ा समस्या नहीं समाधान हूं मैं, इस देश का किसान हूं मैं। घाटमपुर से आए हास्य कवि दिनेश दुबे ने पढ़ा जैसे मुकदमे में जवाब दावा की जरूरत है, वैसे ही यूपी में 20 साल तक बाबा की जरूरत है। इसी प्रकार अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। अध्यक्षता संस्था के संस्थापक कवि नारायण प्रसाद ने की। मुख्य अतिथि स्वामी नित्यानंद व विशिष्ट अतिथि नारायण तिवारी रहे। कार्यक्रम का संचालन देशराज रचनाकर व महामंत्री ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने अपने काव्य पाठ के साथ किया।
इस मौके पर वंदना खरे, मिथलेश प्रजापति, बालकिशुन जोशी, हरीराम गुप्त, रेवती कुमार पाठक, गणेश सिंह विद्यार्थी, शिवकरन सिंह सरस, मुन्नीलाल अवस्थी, कमल किशोर सहित अन्य कवि व श्रोता मौजूद रहे।