हमीरपुर। गांव के विकास के लिए शुरू की गई मातृभूमि योजना अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। यही कारण है कि ढाई साल पहले शुरू की गई योजना में अभी तक एक भी आवेदन नहीं आए हैं।
साधन संपन्न लोगों के सहयोग से गांव के विकास के लिए 5 सितंबर 2021 को उप्र मातृभूमि योजना शासन ने शुरू की थी। योजना के तहत सरकार ने आर्थिक रूप से साधन संपन्न लोगों के साथ मिलकर उनकी मातृभूमि का विकास कराए जाने की तैयार की गई थी। इसमें देश विदेश में रहने वाले लोगों को शासन का सहयोगी बनने की तैयारी की गई थी। योजना के तहत ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराने के इच्छुक लोगों का शासन ने पूरा सहयोग करने की बात कही थी। जिसमें मातृभूमि के विकास के लिए कार्य की लागत का 60 फीसदी धन उस व्यक्ति को व शेष 40 फीसदी धनराशि शासन को देनी थी। गांव के विकास के लिए निजी संस्थाओं के रास्ते खोले गए थे। ऐसे इच्छुक व्यक्तियों को खोजने की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग को दी गई थी। लेकिन खास बात यह है कि ढाई साल पूर्व शुरू हुई योजना का धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। अभी तक अफसर एक भी व्यक्ति को नहीं ढूंढ सके हैं। जिससे यह योजना कागजों की फाइल में दम तोड़ रही है।
इन कार्यों में कर सकते सहयोग
- सामुदायिक भवन, बारातशाला, स्किल सेंटर निर्माण व संचालन, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, उप चिकित्सा केंद्र भवन, साज सज्जा व उपकरण की व्यवस्था, जलनिकासी की व्यवस्था, सीवेज सिस्टम, ड्रेनेज सिस्टम व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कार्य कराए जा सकते हैं। इसके अलावा स्कूल कक्षाओं का निर्माण, स्मार्ट क्लास, खेलकूद मैदान, व्यायामशाला, ओपेन जिम, सोलर एनर्जी, स्ट्रीट लाइटें, पेयजल व्यवस्था के लिए आरओ प्लांट, सीसीटीवी कैमरा, सर्विलांस सिस्टम सहित जन उपयोगी कार्य कराए जाने थे। जिसमें आंगनबाड़ी, एमडीएम रसोईघर, भंडारगृह, अंत्येष्टि स्थल निर्माण, चारागाह विकास, तालाब का सुंदरीकरण, पशु नस्ल सुधार केंद्र, फायर सर्विस स्टेशन, पुस्तकालय, बस स्टैंड आदि कार्य कराए जा सकते हैं।
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- शासन द्वारा शुरू की गई मातृभूमि योजना में अभी तक एक भी आवेदन नहीं आए हैं। कहा कि विभागीय अधिकारियों को योजना का सफल क्रियान्वयन कराए जाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। इसको लेकर उन्होंने प्रयास किया है लेकिन वह सफल नहीं हो सके हैं। -
जीतेंद्र मिश्रा, डीपीआरओ