बाग में आम के फल दिखाता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
अप्रैल में ही पारा 46 डिग्री के आसपास होने से आम की बढ़त पर असर पड़ रहा है। फल का आकार छोटा होने के साथ इसकी मिठास भी कम रहने की आशंका है। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार इस समय 35 से 40 डिग्री तापमान आम के लिए बेहतर होता। लेकिन अधिक गर्मी ने आम के बागवानों को परेशान कर दिया है। वहीं मुसम्मी के पेड़ों पर आए फूलों और फलों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। छोटे-छोटे फल गिरने से किसान चिंतित हैं।
सूखे से जूझ रहे जिले में राठ, मुस्करा, गोहांड, सरीला और मौदहा क्षेत्रों में किसानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी आम और मुसम्मी के बाग तैयार किए हैं। बिवांर के बाबूराम, रामरतन, मातादीन वर्मा, रामरतन कुशवाहा, रजवा पाठक, किशोरी लाल ने बताया कि गर्मी के प्रकोप से बौर मर गई। अब फल आ गए हैं, लेकिन अधिक तापमान से पेड़ पर लगा फल झुलस रहा है। उद्यान विशेषज्ञों की माने तो तपिश में फल से रस गायब हो रहा है। इसी तरह तापमान में बढ़ोत्तरी होती रही तो फल तय समय से पहले ही सूखकर गिर सकता है। वहीं मुसम्मी में भी छोटे छोटे फल तेज गर्मी से मुरझाकर गिर रहे हैं।