इमिलिया गांव स्थित सीएचसी के डिलीवरी रूम में पड़ा ताला।
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क्षेत्र के इमिलिया गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बदतर है। मरीजाें को पीने के पानी से लेकर इमरजेंसी सेवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। कैंपस में गंदगी का अंबार है। प्रसव केंद्र में चार माह से ताला पड़ा है। इससे प्रसूताओं को दूरदराज भटकना पड़ रहा है।
करोड़ाें की लागत से तैयार 35 शैया की सीएचसी बदहाल है। मेन गेट से लेकर सीएचसी तक जगह जगह गंदगी फैली है। पानी की टंकी शोपीस बनी है, इससे मरीजों व तीमारदारों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। सीएचसी में तीन डॉक्टर, दो फार्मासिस्ट व एक दंत सहायक, एक लैब टेक्नीशियन व बार्ड व्वाय सहित आठ कर्मचारी तैनात हैं। इसके बावजूद इमिलिया सहित आधा दर्जन ग्रामों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। दो बजे से सुबह आठ बजे तक आकस्मिक सेवाओं के लिए मरीजों को भटकना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में ज्यादातर लोग अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रहे। आवासों में नहीं रहते हैं।
इतना ही नहीं, सीएचसी बनने के बाद से प्रसव नहीं कराया गया है। अंधेरगर्दी का आलम यह है कि सीएचसी परिसर में ही बनाए गए उपकेंद्र में भी बीते चार माह से ताला पड़ा है। जनवरी में एएनएम सोनी देवी का स्थानांतरण हो गया। तब से खाली है। वहीं अस्पताल परिसर में ग्रामीण खुले में शौच करते हैं। इससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। गांव निवासी ब्लाक प्रमुख अनुपम मिश्रा, भाजपा के जिला महामंत्री मदन मोहन राजपूत व प्रधान पप्पू सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आकस्मिक सेवाएं शुरू कराने व गर्भवती महिलाओं के प्रसव कराने की मांग की है। अस्पताल के प्रभारी बृजेंद्र कुमार राजपूत ने बताया कि अस्पताल परिसर में बने आवासों की हालत सुधरवाने, बिजली-पानी की आपूर्ति सहित मरम्मत कार्याें के लिए उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है।