छानी पंप कैनाल की सूखी पड़ी सिसोलर माइनर।
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बुआई का समय होने के बावजूद छानी पंप कैनाल की हालत में सुधार नहीं हुआ है। यही कारण है कि माइनरें सूखी पड़ी हैं। सिसोलर क्षेत्र में पानी न पहुंचने से सैकड़ों बीघे जमीन पलेवा के इंतजार में परती पड़ी हैं। मुख्य नहर की सफाई न होने से गोंद घास है, जिससे नहर में पानी आगे नहीं बढ़ रहा है। नहर में लिफ्टिंग के लिए लगे पंप क्षमता के अनुसार नहीं चलाए जा रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
सिसोलर क्षेत्र के बीहड़ों में सिंचाई के लिए केन नदी में दो पंप कैनाल संचालित हैं। छानी पंप कैनाल से पानी सप्लाई के लिए छह मोटरें हैं। लेकिन दो खराब हैं। इससे क्षमता के मुताबिक पानी नहीं आ रहा है। वहीं मुख्य नहर पर बने टैंकर से नहर में पानी भेजने के लिए तीन मोटर पंप लगे हुए हैं। इनमें सिर्फ दो सही हैं। इससे एक तो कम क्षमता से पानी जा रहा है। वहीं मुख्य नहर में सफाई व मरम्मत के अभाव से घास ही घास के बढ़ने से पानी की आपूर्ति में बाधा बढ़ रही है। इतना ही नहीं इस नहर से अभी तक सिसोलर माइनर में पानी ही नहीं पहुंचा है। इससे यहां के सैकड़ों बीघा खेत पलेवा के इंतजार में परती पड़े हुए हैं। उधर छानी मुख्य नहर से भटुरी तक ही पानी पहुंच सका है और इसकी टेल भैंसमरी व लेवा तक गई है। भैंसमरी तक भी पानी नहीं पहुंचा पाया। भैंसमरी के किसान रामऔतार ने बताया कि बिजली भरपूर आ रही है और नदी में भी पानी है।
लेकिन विभागीय अधिकारी नहरों की पटरियां कमजोर होने के कारण पूरी क्षमता से पंप नहीं चला रहे हैं। कहा कि फसल बुआई का समय है और पलेवा के बिना बड़ी संख्या में किसानों के खेत परती पड़े हैं। सिसोलर प्रधान विजय शंकर प्रजापति ने कहा कि लघु डाल नहर सिंचाई विभाग की लापरवाही किसानों को भारी पड़ रही है। नहर को कम क्षमता से चलाने के बावजूद बीच से नहर फट गई। जिसे एक सप्ताह बाद विभाग ठीक कर सका। अब मंद गति से पानी आने से पूरा क्षेत्र खेतों में पलेवा के लिए पानी का इंतजार कर रहा है। इस मामले में अधिशाषी अभियंता सुनील कुमार का कहना है कि मोटर पंपो में तकनीकी खामियां आ जाती हैं जिन्हें दुरुस्त कराया जा रहा है। सभी किसानों को पलेवा का पानी मिलेगा।